नोएडा में सील इमारत से गिरे दो मजदूर, एक की मौत, अवैध निर्माण रोकने के आदेश के बावजूद जारी था काम

नोएडा ब्यूरो। नोएडा के सेक्टर-93 बी स्थित ओमेक्स ग्रैंड सोसायटी में अवैध निर्माण को लेकर नोएडा प्राधिकरण की कार्य प्रणाली कटघरे में है। अभी ये मामला ठीक से ठंडा भी नहीं हुआ था कि प्राधिकरण की लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। नोएडा के होशियारपुर में मंगलवार सील इमारत में निर्माण कार्य के दौरान दो मजदूर छत से नीचे गिर गए, जिनमें एक की मौत हो गई। मजदूर की मौत के बाद नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल, भूलेख विभाग समेत अन्य विभागों के अधिकारियों की कार्य प्रणाली सवालों के घेरे में है। क्योंकि नोएडा प्राधिकरण के भूलेख विभाग ने दो सितंबर को ही होशियारपुर में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कई निर्माणाधीन इमारतों को सील किया था। इसमें खसरा नंबर- 483,488, 489 पर अवैध निर्माण कराया जा रहा था। एमपी थ्री रोड स्थित होशियारपुर बाजार में सर्विस रोड किनारे करीब 50 हजार वर्ग मीटर पर अवैध रूप से वाणिज्यक प्रतिष्ठान का निर्माण कार्य चल रहा था।
सीलिंग टीम ने कार्रवाई के दौरान नोटिस चस्पा किया था। अवैध निर्माण करने वाले लोगों को सात दिनों का समय देते हुए कहा गया कि अनधिकृत निर्माण को लेकर कोई उत्तर देना है तो उसे वर्क सर्किल-5 में दिया जाए। सात दिन में जवाब न मिलने पर प्राधिकरण स्वयं इस स्ट्रक्चर को गिरायेगा। साथ ही इस पर आने वाले खर्चे की भी वसूली की जाएगी। मगर इसके बावूद प्राधिकरण के नाक के नीचे सील बिल्डिंग में निर्माण कार्य जारी रहा। इधर, अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 1994 में उच्चतम न्यायालय में एक याचिका पर कई खसरा नंबर को स्थगित कर दिया था। उसमें यह खसरा नंबर भी शामिल है। जिस पर किसी प्रकार का निर्माण नहीं किया जा सकता था। बावजूद अवैध निर्माण कराया जा रहा था।
होशियारपुर बाजार में खुलेआम दो माह से अधिक समय से अवैध निर्माण कराया जा रहा था। यह अवैध निर्माण सिर्फ बाजार ही नहीं, बल्कि शहर में चर्चा का केंद्र बन चुका था, क्योंकि बाजार से लेकर सेक्टर-51 सेक्टर यह वाणिज्यक प्रतिष्ठान तैयार हो रहा था। इस निर्माण को प्राधिकरण अधिकारियों की दो माह से व्यस्तता की आड़ में कराया जा रहा था। चूंकि अधिकारी सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट के अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की तैयारियां, मुख्यमंत्री का आगमन, राष्ट्रीय पर्व पर ध्वज वितरण कार्यक्रम समेत अन्य पर्व के लिए शहर में तैयारियों की व्यस्तता में शामिल थे। इसी का फायदा उठाकर अवैध निर्माण करने वालों ने वर्क सर्किल जेई व सुपरवाइजर को अपने विश्वास में लिया और अवैध निर्माण को तेजी से अंजाम देना शुरू कर दिया। इसी सांठगांठ से बाजार में रात दिन काम चल रहा था। हालांकि भूलेख विभाग अवैध निर्माण की भनक लग चुकी थी, नोटिस जारी करने का आदेश भी दिया था, लेकिन व्यस्तता के चलते समय नहीं मिला और कार्रवाई में देरी हुई।




