पाकिस्तान आजकल हिंदुओं पर इतना मेहरबान क्यों दिख रहा है?

पाकिस्तान को हो क्या गया है? अब तक हिंदुओं पर अत्याचार करने वाले पाकिस्तान के मन में हिंदू प्रेम क्यों जाग गया है? ऐसा क्या हो गया है कि पाकिस्तान भगवद् गीता पढ़ने पर छूट का प्रस्ताव पेश कर रहा है? ऐसा क्या हो गया है कि सैंकड़ों बरसों पुराने बुद्धा पेंडेंट मिलने की बात पाकिस्तान ने दुनिया को बता दी है? ऐसा क्या हो गया है कि पाकिस्तान हिंदू मंदिरों पर से कब्जा छुड़ाकर उनका जीर्णोद्धार करवाने की बात कर रहा है? यह सब सवाल सुनकर आप भी चौंक गये होंगे इसलिए आइये आपको सारी घटनाओं की विस्तार से जानकारी देते हैं।

सबसे पहले बात करते हैं पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की नवनियुक्त सरकार की ओर से किये गये बड़े फैसले की। पाकिस्तानी पंजाब प्रांत की सरकार ने अपने पवित्र धर्म ग्रंथों को कंठस्थ करने पर अल्पसंख्यक समुदायों के कैदियों की सजा अवधि कम करने का प्रस्ताव किया है। इस संबंध में पंजाब प्रांत के गृह विभाग ने मुख्यमंत्री चौधरी परवेज इलाही को प्रांत की जेलों में बंद ईसाई, हिंदू और सिख कैदियों के लिए सजा अवधि में तीन से छह महीने की छूट के वास्ते एक ‘समरी’ भेजी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘पंजाब सरकार के गृह विभाग ने ईसाई और हिंदू कैदियों को उनके पवित्र ग्रंथों- बाइबल और भगवद् गीता को कंठस्थ करने पर सजा की अवधि में तीन से छह महीने की छूट का प्रस्ताव देने के लिए मुख्यमंत्री को एक ‘सारांश’ भेजा है।’’ पंजाब की जेल सेवा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, पवित्र कुरान को याद करने वाले मुस्लिम कैदियों को सजा की अवधि में छह महीने से दो साल तक की छूट मिल सकती है।

अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद सारांश को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद गृह विभाग हिंदू और ईसाई कैदियों की सजा अवधि में कमी संबंधी अधिसूचना जारी करेगा। उन्होंने कहा कि इस कदम से अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखने वाले कैदी अपने पवित्र धर्म ग्रंथों का अध्ययन करने को प्रेरित होंगे। हम आपको बता दें कि मार्च महीने में, लाहौर उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार से अल्पसंख्यक कैदियों को सजा में छूट दिए जाने के संबंध में रिपोर्ट तलब की थी। दरअसल एक ईसाई याचिकाकर्ता ने पाकिस्तान जेल नियम 1978 के नियम 215 के तहत मुसलमानों को दी जाने वाली छूट का हवाला देते हुए अन्य धर्मों के कैदियों के लिए भी इसी तरह की छूट के प्रावधान का अनुरोध किया था। एक आधिकारिक अनुमान के अनुसार, वर्तमान में पंजाब प्रांत की 34 जेलों में ईसाई, हिंदू और सिख सहित 1,188 अल्पसंख्यक कैदी हैं।

अब बात करते हैं मोहनजोदाड़ो में मिले अनूठे ‘बुद्ध पेंडेंट’ की। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में भारी बारिश के बाद वहां स्थित पुरातात्विक स्थल मोहनजोदाड़ो के निकट एक अनूठी प्राचीन वस्तु पायी गई है, जिसे ‘बुद्ध पेंडेंट’ कहा जा रहा है। ‘डॉन’ अखबार की खबर के मुताबिक, तीन अगस्त को भारी बारिश के बाद पुरातात्विक महत्व की यह वस्तु मोहनजोदाड़ों के दक्षिणी दीक्षित क्षेत्र में पायी गई। पुरातात्विक स्थल के करीब स्थित धनाड गांव के निवासी एवं निजी पर्यटक गाइड इरशाद अहमद सोलांगी ने कहा कि भारी बारिश के बाद उन्हें यह वस्तु एक गहरे स्थान पर मिली थी। खबर के मुताबिक, इस वस्तु के मिलने के बाद इरशाद ने तत्काल इसकी सूचना स्थल संरक्षक नवीद संगाह को दी। पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ संरक्षणवादी अली हैदर ने भी इसकी पुष्टि की कि भारी बारिश के कारण ही अनूठी वस्तु सामने आ सकी। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता और वर्तमान में ‘एंडोवमेंट फंड ट्रस्ट’ के परियोजना निदेशक के रूप में काम कर रहे मोहन लाल ने वस्तु की जांच करने के बाद इसकी पहचान ‘बुद्ध पेंडेंट’ के रूप में की।

इस बीच, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 1,200 साल पुराने हिंदू मंदिर को अवैध कब्जेदारों से मुक्त कराकर औपचारिक रूप से आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। एक संघीय निकाय ने बताया कि एक ईसाई परिवार से लंबी कानूनी लड़ाई के बाद इस मंदिर को खाली कराया गया। हम आपको बता दें कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों की देखरेख की जिम्मेदारी संभाल रहे संघीय निकाय निष्क्रांत न्यास संपत्ति बोर्ड ने लाहौर के प्रसिद्ध अनारकली बाजार स्थित वाल्मीकि मंदिर का कब्जा पिछले महीने अपने हाथ में लिया। इस पर गत दो दशक से एक ईसाई परिवार का कब्जा था। हम आपको बता दें कि कृष्ण मंदिर के अलावा वाल्मीकि मंदिर लाहौर का एकमात्र मंदिर है, जिसमें इस समय पूजा अर्चना हो रही है। इस मंदिर पर कब्जा करने वाला ईसाई परिवार दावा कर रहा था कि उसने हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया है और गत दो दशक से हिंदू धर्म के केवल वाल्मीकि जाति के लोगों को ही पूजा अर्चना की अनुमति दे रहा था। अब इस मंदिर को इस परिवार के कब्जे से छुड़वा लिया गया है और कहा जा रहा है कि इसका प्रशासन की ओर से जीर्णोद्धार कराया जायेगा। ईसाई परिवार से मंदिर का हक वापस लेने के बाद मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान किए गये और लंगर का आयोजन भी हुआ।

बहरहाल, पाकिस्तान इस समय जो कुछ कर रहा है वह दुनिया को दूसरा चेहरा दिखाने की कवायद भी हो सकती है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचार को देखते ही भारत को सीएए कानून बनाने की आवश्यकता पड़ी थी। पाकिस्तान इस समय आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है इसीलिए दुनिया को अपना दूसरा चेहरा दिखाने की कोशिश कर रहा है।

लेखक-नीरज कुमार दुबे

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