भारत की 15वीं राष्ट्रपति बनी ‘द्रौपदी मुर्मू’,प्रचंड बहुमत से दर्ज की जीत

नई दिल्ली। देश के 15वें राष्ट्रपति के नाम का हुआ ऐलान हो गया है। भारत की पहली आदिवासी महिला ‘द्रौपदी मुर्मू’ ने बड़ी जीत हासिल कर बनी देश की 15वीं राष्ट्रपति। इसी के साथ द्रौपदी मुर्मू देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बन गई है और देश की दुसरी महिला राष्ट्रपति भी हो गई है। इस बड़ी जीत के साथ वो देश के 15वें राष्ट्रपति के रूप में 25 जुलाई को शपथ लेंगी। उन्होंने 5,77,778 वोटों से जीत दर्ज की है।

देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने वाली पहली आदिवासी महिला नेता होंगी। क्योंकि भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी आदिवासी समाज का व्यक्ति भारत के संविधान के इतने बड़े पद पर विराजमान होने वाला है। द्रौपदी मुर्मू ने 1997 में रायरंगपुर नगर पंचायत का पार्षद बनने के साथ अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। एनडीए उम्मीदवार के रुप में नाम के ऐलान के साथ ही प्रचंड जीत की कयास लगाए जा रहे थे।

द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून साल 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव में हुआ था। मुर्मू संथाल आदिवासी परिवार से आती हैं। उनके पिता का नाम बिरंची नारायण टुडू था। वह किसान थे। द्रौपदी मुर्मू की शादी श्याम चरण मुर्मू से हुई थी। दोनों से चार बच्चे हुए। इनमें दो बेटे और दो बेटियां। साल 1984 में एक बेटी की मौत हो गई। इसके बाद 2009 में एक और 2013 में दूसरे बेटे की अलग-अलग कारणों से मौत हो गई। 2014 में मुर्मू के पति श्याम चरण मुर्मू की भी मौत हो गई है। बताया जाता है कि उन्हें दिल का दौरा पड़ गया था। अब उनके परिवार  में सिर्फ एक बेटी है। जिनका नाम इतिश्री है।

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