जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के मामले में सीजेपी के तीन नेता गिरफ्तार, सौरव दास और आशुतोष रांका को भेजा तिहाड़ जेल

एसआईआर के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

आशुतोष रांका और सौरव दास (फाइल फोटो)

नई दिल्ली,एजेंसी। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और नई दिल्ली जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। इसी बीच मंगलवार सुबह प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने के आरोप में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संयोजक सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने तीनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया। बुधवार सुबह तीनों को संसद मार्ग स्थित एसीएम अदालत में पेश किया गया, जहां पिछली जमानत की शर्तों के उल्लंघन के मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन के लिए तिहाड़ जेल भेजने का आदेश दिया गया। वहीं, अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके और जमानती के आधार पर रिहा कर दिया गया।
पुलिस के अनुसार, मंगलवार सुबह सीजेपी के तीन नेताओं सहित संगठन के 11 अन्य सदस्य लोहे के गेट पर चढ़कर जंतर-मंतर परिसर में प्रवेश कर गए थे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए सरकारी कामकाज में बाधा डाली। इसके बाद सभी 14 लोगों को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस ने हिरासत में लिए गए लोगों को नई दिल्ली से करीब 40 किलोमीटर दूर जाफरपुर कलां थाने में रखा। बुधवार तड़के करीब तीन बजे 11 समर्थकों को छोड़ दिया गया, जबकि सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे के खिलाफ संसद मार्ग थाने में मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने एक निजी परिसर के रास्ते जंतर-मंतर में प्रवेश किया था। पुलिस का कहना है कि संबंधित स्थान को अब प्रदर्शन के लिए निर्धारित क्षेत्र के रूप में मान्यता नहीं दी गई है। नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने बताया कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को रोकने और बिना अनुमति प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने के आरोपों में कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार, जनशांति भंग करने और कानून का उल्लंघन करने की आशंका को देखते हुए तीनों नेताओं के खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कदम उठाए गए। अधिकारियों ने यह भी कहा कि सामाजिक माध्यमों के जरिए अन्य लोगों को ऐसी गतिविधियों में शामिल होने के लिए कथित तौर पर प्रेरित करने के पहलू पर भी ध्यान दिया गया है।
अदालत में पेशी के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन के लिए जेल भेजे जाने का आदेश दिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत ने पूर्व में दी गई जमानत की शर्तों के उल्लंघन और कानून के बार-बार उल्लंघन की आशंका पर विचार किया। दूसरी ओर, अजिंक्य शिंदे के मामले में पहली बार मुकदमा दर्ज होने और गिरफ्तारी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने उन्हें पांच हजार रुपये के निजी मुचलके तथा इतनी ही राशि के जमानती पर छह महीने तक शांति बनाए रखने और अच्छा व्यवहार करने की शर्त के साथ जमानत दे दी।
इस मामले में पुलिस ने सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने, सरकारी आदेश का उल्लंघन करने, प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने, मारपीट, आपराधिक साजिश और शांति भंग करने सहित विभिन्न आरोपों के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक, संबंधित धाराओं में अधिकतम पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। हालांकि, आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होगी।
सीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं की हिरासत को लेकर संगठन की ओर से मंगलवार से ही उन्हें रिहा करने की मांग की जा रही थी। रत्ना सिंह ने सामाजिक माध्यम एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को जल्द ही अदालत में पेश किया जा सकता है। उन्होंने दिल्ली पुलिस को लेकर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पुलिस उच्च स्तर से मिले निर्देशों के अनुसार काम कर रही है और कानून की अनदेखी कर रही है। रत्ना सिंह ने यह भी दावा किया कि हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को करीब 24 घंटे तक वकीलों से मिलने नहीं दिया गया और शुरुआत में उन्हें हिरासत या गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी भी नहीं दी गई। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की कार्रवाई को शांतिपूर्ण बताते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
एक ओर पुलिस ने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश, सरकारी कामकाज में बाधा और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को कार्रवाई का आधार बताया है, वहीं सीजेपी की ओर से हिरासत और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। मामले में पुलिस के आरोपों और संगठन की ओर से लगाए गए आरोपों पर आगे की स्थिति न्यायिक प्रक्रिया के दौरान स्पष्ट होगी।

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