बोट क्लब पर आंदोलनों पर चली लाठियां-गोलियां, कांग्रेस ने बाद में प्रदर्शन पर लगाई रोक : हर्ष मल्होत्रा
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के दिल्ली पुलिस के फैसले को जनहित में बताया। उन्होंने कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और सीजेपी के विरोध को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि बढ़ते यातायात और जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए वैकल्पिक प्रदर्शन स्थल निर्धारित करना जरूरी है।
नई दिल्ली। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि दिल्लीवासियों को होने वाली असुविधा को ध्यान में रखते हुए जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का दिल्ली पुलिस का निर्णय जनहित में है। उन्होंने कहा कि इस फैसले का कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और सीजेपी द्वारा विरोध किया जाना राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित होने के साथ-साथ हास्यास्पद भी है।
हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जब-जब सत्ता में रही हैं, तब उनके कार्यकाल में प्रदर्शनकारियों के प्रति अपनाए गए रवैये को भी याद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “दिल्ली एवं देश अभी भूला नहीं है कि दिल्ली में 1993 तक बोट क्लब प्रदर्शन स्थल हुआ करता था। कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में गौहत्या विरोधी आंदोलन, किसान आंदोलन और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई हुई और इसके बाद नई दिल्ली के बोट क्लब पर प्रदर्शनों को प्रतिबंधित कर दिया गया।”
भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि आज जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले का विरोध करने वाली पार्टियों का अपना राजनीतिक इतिहास भी प्रदर्शनकारियों के प्रति बहुत उदार नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का महत्वपूर्ण अधिकार है, लेकिन इसके साथ आम जनता की सुविधा, यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक जीवन को सुचारु बनाए रखना भी सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
हर्ष मल्होत्रा ने आम आदमी पार्टी और सीजेपी के नेताओं की आपत्तियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी प्रदर्शनों को लेकर कठोर रुख अपनाते रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अगस्त 2016 में केजरीवाल के आवास के आसपास प्रदर्शन को लेकर स्थानीय प्रशासन के माध्यम से प्रतिबंध लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के उदाहरणों को देखते हुए आज जंतर-मंतर के संबंध में की जा रही राजनीति उचित नहीं है।
उन्होंने पंजाब में विभिन्न वर्गों के आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्मचारी, छात्र, व्यापारी और किसान अपनी मांगों को लेकर समय-समय पर प्रदर्शन करते रहे हैं। मल्होत्रा ने आरोप लगाया कि कई मौकों पर इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई की स्थिति बनी है। उन्होंने कहा कि ऐसे में प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 1993 से 2026 तक लगभग 33 वर्षों में जंतर-मंतर हजारों प्रदर्शनों का गवाह रहा है। राजधानी के विस्तार, बढ़ती आबादी, यातायात के दबाव और आम लोगों की बढ़ती आवाजाही के कारण अब बड़े प्रदर्शनों का प्रभाव केवल प्रदर्शन स्थल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के जनजीवन पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए ऐसे स्थान निर्धारित किए जाने चाहिए जहां लोकतांत्रिक विरोध भी हो सके और आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी भी न हो।
मल्होत्रा ने कहा कि दिल्ली पुलिस द्वारा तीन नए प्रदर्शन स्थल निर्धारित करने का निर्णय इसी संतुलन की दिशा में उठाया गया कदम है। इससे प्रदर्शनकारियों को अपनी मांगें और विरोध दर्ज कराने के लिए निर्धारित स्थान मिलेंगे, जबकि राजधानी के प्रमुख मार्गों और व्यस्त क्षेत्रों में यातायात तथा सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की संभावना कम होगी।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन का स्वरूप और स्थान ऐसा होना चाहिए जिससे आम जनता के अधिकार और सुविधा भी प्रभावित न हों। उन्होंने दिल्ली पुलिस के निर्णय को इसी दृष्टि से जनहित में लिया गया कदम बताते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर विरोध की राजनीति करने के बजाय आम दिल्लीवासियों की सुविधा और राजधानी की व्यवस्था को भी ध्यान में रखना चाहिए।




