मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में करोड़ों के घोटाले का आरोप, पूर्व डीएफओ पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप

मनेन्द्रगढ़/छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटालों और गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। पूर्व डीएफओ (IFS मनीष कश्यप) पर वन विभाग के कार्यों में भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़े और जनप्रतिनिधियों व विभागीय सचिव के साथ अभद्र व्यवहार करने के गंभीर आरोप थे। इन विवादों और आरोपों के चलते उन्हें अपने पद से निलंबित कर दिया गया था।
मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का मामला सामने आया है, जिसमें पूर्व डीएफओ मनीष कश्यप पर मद परिवर्तन कर समितियों के खातों से रकम निकालने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, वन विभाग से जुड़े विकास कार्यों के लिए जारी शासकीय राशि का दुरुपयोग करते हुए उसे विभिन्न समितियों के खातों में ट्रांसफर किया गया और बाद में समिति सचिवों के माध्यम से नकद निकासी कर ली गई।
बताया गया है कि इस पूरे मामले को लेकर सोशल ऑडिट टीम और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) से जांच की मांग की गई है। शिकायत में बैंक स्टेटमेंट, भुगतान वाउचर, कार्य स्वीकृति आदेश और समितियों की बैठकों के दस्तावेजों का हवाला दिया गया है। आरोप है कि दस्तावेजों में कार्य पूर्ण होने की प्रविष्टियां दर्ज हैं, जबकि मौके पर निरीक्षण में कई कार्य अस्तित्व में नहीं पाए गए या बेहद निम्न स्तर के मिले।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह अनियमितता लंबे समय से चल रही थी और इसमें लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक के लेन-देन की आशंका जताई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है, जिससे पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके और इसमें शामिल अधिकारियों एवं अन्य व्यक्तियों की भूमिका सामने आ सके।
वहीं, इस मामले पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि विभागीय सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक स्तर पर कुछ दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी गई है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस प्रकरण के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है। सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों का कहना है कि वन क्षेत्र के विकास और आदिवासी कल्याण के नाम पर आने वाली राशि का दुरुपयोग किया गया है, जिससे वास्तविक लाभार्थियों को उनका हक नहीं मिल पाया।
मामले को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। विभिन्न दलों के नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही है। उनका कहना है कि चाहे कोई भी व्यक्ति हो, यदि दोषी पाया जाता है तो उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, सोशल ऑडिट रिपोर्ट और ईओडब्ल्यू की प्रारंभिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो यह मामला वन विभाग के इतिहास के बड़े वित्तीय घोटालों में शामिल हो सकता है।




