तरुण हत्याकांड में दिल्ली पुलिस ने कहा कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं, पार्किंग विवाद में हुई हत्या’, कोर्ट में 500 पन्नों की चार्चशीट दाखिल

दिल्ली पुलिस ने उत्तम नगर के तरुण बुटोलिया हत्याकांड में चार्जशीट दाखिल कर दी है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं, बल्कि पड़ोसियों के बीच पार्किंग और कूड़ा फेंकने के पुराने विवाद का परिणाम था।
पश्चिमी दिल्ली। उत्तम नगर के हस्तसाल पुनर्वासित कॉलोनी में होली के दिन हुए तरुण बुटोलिया हत्याकांड में दिल्ली पुलिस ने रविवार को द्वारका कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। करीब 500 पन्नों की इस चार्जशीट में पुलिस ने साफ किया है कि यह कोई साम्प्रदायिक दंगा या धार्मिक विवाद नहीं था, बल्कि दो पड़ोसी परिवारों के बीच पिछले कई वर्षों से चले आ रहे पार्किंग और कूड़ा फेंकने के विवाद की हिंसक परिणति थी, जिसने होली के दिन एक छोटे बच्चे द्वारा पानी से भरे गुब्वारे के फेंकने पर उड़े पानी के छींटों ने खूनी संघर्ष का रूप से लिया। दिल्ली पुलिस ने अपनी जांच में बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि यह दो पुराने पड़ोसियों का निजी झगड़ा था। लंबे समय से चली आ रही रंजिश और उस दिन के तात्कालिक विवाद ने भीड़ को उकसाया। अब कोर्ट इस चार्जशीट पर संज्ञान लेगा, जिसके बाद मामले की औपचारिक सुनवाई शुरू होगी।
पुलिस जांच के अनुसार, घटना की शुरुआत होली के दिन 4 मार्च को हुई थी। एक 11 वर्षीय बच्ची जो मृतक तरुण की स्वजन है, ने खेल-खेल में बालकनी से गुब्बारा फेंक दिया था। जमीन पर गिरे उस गुब्बारे के पानी के छींटे पड़ोसी जो मुस्लिम समुदाय की एक महिला थी के कपड़ों पर पड़ गया था। इस मामूली बात पर महिला ने अपने अपने लोगों को बुला लिया था। इस दौरान दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई। उस समय तो मामला शांत हो गया पर फिर रात करीब 11 बजे मुस्लिम पक्ष के लोगों ने होली मनाकर घर लौटे तरुण पर हमला कर दिया। सड़क पर हुए इस टकराव में दोनों तरफ से 8 लोग घायल हुए थे।
चार्जशीट के मुताबिक, 26 वर्षीय तरुण बुटोलिया दोस्तों के साथ होली खेलकर घर लौट रहे थे और वह इस विवाद से पूरी तरह अंजान थे। घर के पास पहुंचते ही करीब 15-20 हमलावरों ने उन्हें घेर लिया। आरोपितों ने लोहे की राड और डंडों से उन पर तब तक प्रहार किए जब तक वह बेसुध नहीं हो गए।
इसके बाद भी हमलावर नहीं रुके और एक बड़े पत्थर से तरुण के सीने पर वार कर दिया। अगले दिन अस्पताल में तरुण ने दम तोड़ दिया। मृतक के पिता मेमराज का आरोप था कि उनके बेटे को जानबूझकर निशाना बनाया गया था और बीच बचाव को आई महिलाओं के साथ भी बदसलूकी की गई थी।
चार्जशीट में गंभीर धाराएं और आरोपितों का विवरण
पुलिस ने इस मामले में कुल 20 लोगों की भूमिका तय की है। इसमें 18 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, इनमें सायरा उर्फ काली, शरीफन, सलमा, सुहैल उर्फ साहिल, समीर चौहान, फिरोज, इस्माइल, उमरदीन, जुम्मेदीन, मुश्ताक, कमरुद्दीन, मुजफ्फर, ताहिर और इमरान उर्फ बंटी आदि नाम शामिल हैं। वहीं घटना में शामिल 2 नाबालिगों के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट (पीआईआर) सौंपी गई है।
आरोपितों पर हत्या (धारा 302), दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, आपराधिक अतिक्रमण और एसटीएससी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं इन पर नाबालिगों को अपराध में शामिल करने के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 95 और पांच या अधिक लोगों द्वारा मिलकर हत्या करने के लिए धारा 103(2) भी जोड़ी गई है। चार्जशीट में बताया गया है कि दो मुख्य संदिग्ध अभी भी फरार हैं। उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं और उनकी तलाश में छापेमारी जारी है।




