वाह साहेब! पुल गिरने पर सजा के बदले ईनाम और गालीबाज आईएएस को थमा दिया ‘शिक्षा’ विभाग

पटना,(एजेंसी)। नीतीश कुमार- तेजस्वी यादव की सरकार ने गुरुवार को कई आईएएस अफसरों का तबादला करते हुए उनके विभाग बदल दिए। कुछ अफसरों का ट्रांसफर किया गया तो कुछ को अतिरिक्त जिम्मेवारी भी दे दी गई। लेकिन अब सियासी गलियारे में दबी जुबान से तबादला होते ही चर्चा शुरू हो गई है। वैसे तो तबादले वाली लिस्ट में कई अफसर हैं लेकिन चर्चा दो नामों की हो रही है। पहला नाम है अगुवानी घाट पुल गिरने के बाद बीजेपी के साथ साथ सत्ताधारी जेडीयू विधायक डॉक्टर संजीव कुमार के निशाने पर आए आईएएस प्रत्यय अमृत का। वहीं दूसरा नाम है शराबबंदी वाले विभाग से हटाए गए आईएएस के के पाठक का।
प्रत्यय अमृत को सजा के बदले ईनाम!
पहले नाम की चर्चा पहले। अभी कुछ ही दिन पहले बिहार के सुल्तानगंज में अगुवानी घाट के पास गंगा नदी पर बन रहे पुल ने जलसमाधि ले ली। 1710 करोड़ का नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट देखते ही देखते चंद सेकेंड में गंगा नदी में समा गया। इससे एक साल पहले आंधी के एक झोंके ने कथित ताकतवर पुल का एक हिस्सा झंझोड़ कर नेस्तनाबूद कर दिया था। ये पुल पथ निर्माण विभाग की देख रेख में ही बन रहा था। पुल गिरने के बाद विपक्षी बीजेपी के साथ साथ परबत्ता के जदयू विधायक डॉ संजीव कुमार ने आईएएस और विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। लेकिन तबादले वाली लिस्ट को देख सियासी गलियारे में दबी दबी सी हैरानी है। क्योंकि प्रत्यय अमृत के पास पथ निर्माण विभाग को बरकरार ही रहा, साथ ही तबादले की लिस्ट में उन्हें आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव का भी चार्ज दे दिया गया। इस विभाग को भी काफी अहम माना जाता है। सवाल यही है कि ये सजा है या ईनाम?
गालीबाज आईएएस को शिक्षा जैसा विभाग
अब दूसरे नाम की चर्चा… आईएएस के के पाठक मद्य निषेध, उत्पाद विभाग एवं निबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव के चार्ज में थे। पाठक की गिनती कड़क आईएएस अफसर के तौर पर भी की जाती रही है। लेकिन अभी कुछ महीने पहले ही फरवरी में के के पाठक के दो वीडियो वायरल हुए थे। इस वीडियो में वो गाली बकते नजर आ रहे थे। ये गालियां वो जूनियर अफसरों और बिहार के लोगों को दे रहे थे। उस वक्त तो जूनियर अफसरों और संगठन ने मोर्चा भी खोल दिया। लेकिन के के पाठक का बाल भी बांका नहीं हुआ। अब तबादले के बाद उन्हें शिक्षा विभाग का अपर मुख्य सचिव बना दिया गया है। सोचिए, ‘शिक्षा’ जैसा अहम विभाग। अब के के पाठक यहां के अफसरों से कैसे डील करेंगे, विपक्ष इसकी ताक में भी नजरें गड़ा चुका है। उनके गाली देने वाला वीडियो आप नीचे देख सकते हैं।
आखिर नीतीश कुमार ऐसा क्यों कर रहे हैं?
सवाल बड़ा अहम है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की सरकार इन दो अफसरों के तबादले से क्या इशारा देना चाहती है? सजा के बदले ईनाम के इस फॉर्म्यूले को लेकर सियासी गलियारे में बड़ी हैरानी है।

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