इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों की वर्तमान स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

नई दिल्ली/एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को बांबे हाई कोर्ट के फैसले के विरुद्ध केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया। हाई कोर्ट ने इंटरनेट मीडिया पर सरकार के विरुद्ध फर्जी और झूठे कंटेंट को रेगुलेट करने के मकसद से सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों में 2023 के संशोधनों को रद कर दिया था और उन्हें असंवैधानिक बताया था।
इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों की मौजूदा स्थिति पर चिंता
हालांकि, शीर्ष अदालत ने 2024 के हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। साथ ही इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने स्टैंड-अप कामेडियन कुणाल कामरा, एडिटर्स गिल्ड आफ इंडिया और एसोसिएशन आफ इंडियन मैगजींस सहित मूल याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी किए। बांबे हाई कोर्ट ने 26 सितंबर, 2024 को संशोधित आइटी नियमों को रद कर दिया था। सुनवाई के दौरान केंद्र की तरफ से सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार का इरादा कंटेंट को पूरी तरह से ब्लाक करने का नहीं, बल्कि गलत जानकारी को रेगुलेट करने का है।
फर्जी संदेशों की ओर इशारा
प्रधान न्यायाधीश ने भारतीय सेना और राष्ट्रीय नीतियों से जुड़े फर्जी संदेशों की ओर इशारा करते हुए कहा कि आजकल इनमें से कुछ प्लेटफार्म जिस तरह से काम कर रहे हैं। रिकार्ड में दिए गए उदाहरणों को देखें, वे कितने खतरनाक तरीके से काम करते हैं।
उन्होंने पूछा कि क्या मौजूदा व्यवस्था इंटरमीडियरीज पर कोई जिम्मेदारी डाले बिना पूरा बोझ मशीनरी पर डाल देता है। एक प्रतिवादी के वकील अरविंद दातार ने कहा कि मौजूदा नियम पहले ही 24 घंटे में कंटेंट हटाने की इजाजत देते हैं। 2023 के संशोधन गलत थे क्योंकि गुमराह करने वाली जानकारी को परिभाषित नहीं किया गया था।




