गोरखपुर में पौत्री ने गड़ासे से गला काटकर दादी की हत्या की
फर्श पर फैले खून को पोंछे से किया साफ, गड़ासा गोबर में छिपाया

गोरखपुर/उत्तर प्रदेश। गोरखपुर की पुलिस ने पीपीगंज इलाके के भुईधरपुर गांव में कलावती हत्याकांड का पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद पौत्री खुशी ने फर्श पर फैले खून को पोंछा लगाकर साफ कर दिया। इसके बाद दरी में शव को लपेट छप्पर में एक किनारे रख दिया। हत्या में इस्तेमाल गड़ासे को गोबर की ढेर में छिपा दिया ताकि कोई शक न करे। इस बीच बैंक से घर पहुंची मां उतरा जब खुशी को खोजते हुए छप्पर में पहुंची तो बेटी के कपड़े और शरीर पर खून के दाग देख दंग रह गई।
बेटी की आपबीती सुनने पर उसने शव को ठिकाने लगाने में मदद की। इसके बाद से किसी भी हाल में मुंह न खोलने की हिदायत दी। ये बातें खुशी ने पूछताछ के दौरान पुलिस से कहीं। पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद मां-बेटी ने शव को सड़क किनारे फेंक दिया। पुलिस को भ्रमित करने के लिए कलावती के शव के पास एक झोले में हंसिया रख दिया गया ताकि ऐसा लगे कि किसी ने खेत से लौटते समय हमला किया हो। इस चाल से उन्होंने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की लेकिन जांच में जब फॉरेंसिक टीम ने भूसे के कमरे से खून के निशान पाए तो शक गहराने लगा। इसके बाद पुलिस ने मां-बेटी से अलग-अलग पूछताछ की तो खुशी टूट गई और वारदात की बात कबूल की। पुलिस ने खुशी की निशानदेही पर गोबर के ढेर से गड़ासा भी बरामद कर लिया।
एपी नार्थ ने बताया कि जांच के दौरान जब भी पुलिस पूछताछ के लिए कलावती के घर जाती तो खुशी अपनी मां उतरा के पास ही बैठी रहती और सवालों से बचने की कोशिश करती। उसकी हरकतों से पुलिस को धीरे-धीरे उस पर शक होने लगा। इससे पहले पुलिस ने शव पर लिपटी हुई दरी के बारे में उतरा से पूछताछ की तो उसने खुद की दरी होने से साफ इन्कार कर दिया था। जब पुलिस ने उतरा के पति परदेशी यादव से पूछताछ कर फोटो दिखाया तो उसने दरी खुद खरीदकर घर लाने की बात कही। इस पर पुलिस को उतरा पर भी शक हो गया था। इधर खोजी कुत्ते के बार-बार नल के पास आने से भी पुलिस का शक गहराने लगा। पुलिस ने जब कड़ियां जोड़नी शुरू कीं तो वारदात का पर्दाफाश हो गया। पुलिस ने 300 से अधिक सीसीटीवी खंगाले लेकिन कहीं भी कलावती आते-जाते नहीं दिखी थीं।
खुशी ने पूछताछ में बताया कि जब से उसने होश संभाला, उसे दादी का कभी प्यार नहीं मिला। वह अक्सर बात-बात पर ताने मारतीं थीं। यहां तक की पढ़ाई छुड़ा कर नौकरानी जैसा बर्ताव करने लगी थीं। वह मुझे देखना भी पसंद नहीं करती थीं। यहां तक की उनके तानों से खाना पीना भी हराम हो गया था। उसने कई बार कलावती को मारना चाहा, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पाई थी। वारदात के दिन दोपहर में जब वह अपने छप्पर में सो रही थीं तो वहां पास में मौजूद गड़ासे से उनकी गर्दन पर एक के बाद चार वार कर सिर को धड़ से अलग कर दिया।
गांव के लोगों का कहना है कि कलावती बेहद सरल और मिलनसार महिला थीं। उन्होंने कभी किसी से दुश्मनी नहीं रखी। महिलाएं और बुजुर्ग कलावती के घर पहुंचकर परदेशी यादव को ढांढस बंधा रहे थे। ग्रामीणों का कहना था कि खुशी जब तीन साल की थी तो परदेशी, उतरा को शादी करके यहां लाया था। ये बात सही है कि कलावती खुशी को परदेशी की बेटी नहीं मानती थी। वहीं परदेशी से हुए दो बेटों को वह अधिक दुलार करती थीं। जब मां कलावती की हत्या में बेटी खुशी और उसकी पत्नी उतरा का नाम सामने आया तो परदेशी फूट-फूटकर रोने लगा। उसने रोते हुए कहा कि जिस बेटी को प्यार दिया, वही मां की दुश्मन निकली और पत्नी ने भी उसका साथ दिया। यह देखकर मौजूद ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गईं।

गिरफ्तार दोनों हत्यारोपी मां और बेटी




