ग्रेटर नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर चलाकर ठगी कर रहा था बीकॉम पास दिव्यांग

पांच महिलाओं समेत आठ गिरफ्तार

ग्रेटर नोएडा। बिसरख कोतवाली क्षेत्र के गौर सिटी सेंटर में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का बिसरख कोतवाली पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए पांच महिलाओं समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। कॉल सेंटर से ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिए लोगों से ठगी की जा रही थी। कॉल सेंटर का संचालन बीकॉम पास दिव्यांग सोनल उर्फ अनिरुद्ध कर रहा था। कॉल सेंटर ग्रेटर नोएडा में छह महीने से संचालित था। इससे पहले दिल्ली में बैठकर ठग लोगों को आनलाइन गेमिंग एप पर पैसे कमाने के नाम पर ठगी का शिकार बना रहे थे।
आरोपितों की पहचान जलबलपुर मध्यप्रदेश के सोनल उर्फ अनिरूद्ध के रूप में हुई है। वह बीकॉम पास है। दूसरा आरोपित उत्तर प्रदेश के गाजीपुर फदौरा दक्षिण मोहल्ला का रहने वाला अजय सिंह बीएससी पास है। जबकि अलीगढ़ जरौली धूम सिंह बीसीए की पढ़ाई किए हुए है।
जबकि महिला आरोपितों में रायल रेजीडेंसी सोसायटी ग्रेनो वेस्ट निवासी रूचि, गाजियाबाद क्रोसिंग की कोमल, छपरौला थाना बादलपुर निवासी सुषमा, प्रतापगढ़ कन्हई हरकला निवासी सोनिया के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से 18 मोबाइल फोन, चार लैपटाप, 155 सिम कार्ड, दो कम्प्यूटर, चार वाईफाई माडम, 10 पेज डाटा शीट, 10 हेडफोन, 50 पेमेंट क्यूआर कोड स्कैनर और 45 हजार रुपये की नकदी के साथ अन्य सामान बरामद किया है।
डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि बिसरख कोतवाली पुलिस की टीम ने बुधवार को लोकल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर गौर सिटी सेंटर में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर के संचालन की सूचना मिली।
पुलिस पूछताछ में पता चला है कि कॉल सेंटर में बैठकर महिलाएं ऐसे लोगों से संपर्क करती थी जो गेम खेलने के लिए इच्छुक होते थे। इसके बाद इन्हें झांसे में लेकर गेम जीतने का लालच दिया जाता था। शुरुआत में छोटी रकम लगवाई जाती थी। इसके बाद गेम जितवा दिया जाता था। इसके बाद मोटी रकम लगवाई जाती थी और गेम हरवा कर रकम को वापस नहीं करते थे।
वेबसाइट पर संपर्क करने वाले लोगों को बनाते थे शिकार
कॉल सेंटर का संचालन करने वाले सरगना ने मजाबुक मजे से जीतो एक गेमिंग वेबसाइट बना रखी थी। इस वेबसाइट पर पहले गेम खेलने वाले खिलाड़ी को रजिस्ट्रेशन करना होता था। इसके बाद क्रिकेट, कसीनो, एविएटर, रोलेट, हरालाल नंबरिंग आदि गेम खिलवाते थे। ग्राहक को लालच देकर रकम निवेश करवाई जाती थी। इसके बाद उन्हें गेम हरवाकर उनकी रकम को हड़प लिया जाता था। आरोपित क्यूआर कोड के माध्यम से रकम लेते थे और अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लेते थे।

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