अयोध्या की मस्जिद पाई-पाई को मोहताज, एक करोड़ के भी पड़े लाले

अयोध्या/उत्तर प्रदेश। राम मंदिर में बीते 25 नवंबर को धर्म धव्जारोहण होने के बाद सभी तरह के निर्माण कार्य पूरे होने के लिए 30 अप्रैल की तारीख तय कर दी गई है। वहीं, दूसरी तरफ अयोध्या के धन्नीपुर गांव में बनने वाली मस्जिद का निर्माण कार्य अभी भी अधर में लटका है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यूपी सरकार की तरफ से इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट को, धन्नीपुर गांव में मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन उपलब्ध करवाई गई थी। लेकिन, मस्जिद के लिए धन संग्रह ना होने की वजह से अभी तक निर्माण कार्य रुका हुआ है।
इस संबंध में ट्रस्ट के चेयरमैन जुफर अहमद फारुकी का कहना है कि मस्जिद का नक्शा पास करवाने और इसका निर्माण शुरू करवाने के लिए 15 करोड़ रुपये की धनराशि चाहिए, लेकिन ट्रस्ट के पास एक करोड़ का भी संग्रह नहीं हो पाया है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि रमजान के बाद अप्रैल में मस्जिद के नए डिजाइन का नक्शा जमा किया जा सकता है। तैयार किया जा रहा नया डिजाइन अवधी कल्चर के मुताबिक होगा।
फारुकी ने बताया कि मस्जिद के लिए घर-घर जाकर रकम जमा करने का कोई अभियान नहीं चलाया जाएगा। ना ही इसके लिए कोई जनजागरण कार्यक्रम चलाया जाएगा। समाज के धनी लोगों और विदेश में रह रहे लोगों से संपर्क कर मस्जिद के लिए सहयोग की अपील की जाएगी। हालांकि, इसमें सबसे बड़ी अड़चन यह है कि मस्जिद ट्रस्ट का अभी तक एफसीआरए में रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। इस वजह से विदेश से चंदा नहीं लिया जा सकता।
उन्होंने बताया कि मस्जिद का निर्माण बहुत हद तक विदेश से मिलने वाली सहयोग राशि पर निर्भर करेगा। इसलिए, अब प्रयास तेज कर जल्द ही ट्रस्ट का एफसीआरए में रजिस्ट्रेशन करवाया जाएगा। फारुकी का कहना है कि लाखों रुपये की धनराशि तो अयोध्या विकास प्राधिकरण से मस्जिद का नक्शा पास करवाने में ही लग जाएगी। हमें पहले चरण में इसी की व्यवस्था करनी है, जो रमजान के बाद शुरू होगी।
जुफर अहमद फारुकी ने बताया कि सबसे पहले मस्जिद का निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा। इसके बाद हॉस्पिटल, कम्युनिटी किचन, लाइब्रेरी और संग्रहालय आदि का निर्माण शुरू हो सकता है। गौरतलब है कि फारुकी ने कुछ महीने पहले मस्जिद के नए डिजाइन का नक्शा 31 दिसंबर 2025 तक अयोध्या विकास प्राधिकरण में अप्रूवल के लिए जमा करने का बयान दिया था। पहले मस्जिद का नाम धन्नीपुर मस्जिद रखा गया था, लेकिन अब नया डिजाइन अवधी कल्चर के हिसाब से बन रहा है। मस्जिद को अब मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह मस्जिद के नाम से जाना जाएगा।



