मनेंद्रगढ़ में अवैध कोयले का धंधा, सफेद मिट्टी की आड़ में ट्रकों से सप्लाई

सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि यह पूरा खेल दिनदहाड़े मिनी ट्रकों के जरिए संचालित हो रहा है। बताया जा रहा है कि ट्रकों में कोयला भरने के बाद उसके ऊपर सफेद मिट्टी की मोटी परत डाल दी जाती है, ताकि पहली नजर में वाहन सामान्य मिट्टी या निर्माण सामग्री से भरा लगे और जांच एजेंसियों की नजर से बच सके।
शोभित शर्मा,मनेंद्रगढ़/छत्तीसगढ़। जिले में अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए उच्च अधिकारियों के सख्त निर्देशों के बावजूद खड़गवां क्षेत्र से अवैध कोयले का धंधा खुलेआम जारी है। सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार चिरमिरी बड़ी बाजार से गोदरीपारा, भुकभुकी, दुबछोला, सिंघट और दुग्गी मार्ग होते हुए पोड़ी-बचरा क्षेत्र के ईंट भट्ठों तक मिनी ट्रकों के जरिए दिनदहाड़े कोयले की आपूर्ति की जा रही है।
बताया जा रहा है कि ट्रकों में कोयला भरने के बाद उसके ऊपर सफेद मिट्टी की मोटी परत डाल दी जाती है, ताकि वाहन सामान्य मिट्टी या निर्माण सामग्री से भरा लगे और जांच एजेंसियों की नजर से बच सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह तरीका लंबे समय से अपनाया जा रहा है, जिससे अवैध परिवहन के बावजूद कार्रवाई नहीं हो पा रही।
सूत्रों के अनुसार यह कोयला नियमित रूप से ईंट भट्ठों तक पहुंचाया जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि इतने लंबे रूट पर लगातार परिवहन के बावजूद खनिज, पुलिस और राजस्व विभाग की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ रही। यह संकेत देता है कि मामला छोटा-मोटा नहीं बल्कि संगठित नेटवर्क हो सकता है।
जिले और संभाग स्तर के अधिकारियों द्वारा बार-बार निर्देश दिए जाते रहे हैं कि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियां संचालित नहीं होंगी। इसके बावजूद यदि अवैध कोयले का परिवहन इस तरह खुलेआम जारी है, तो यह सीधे तौर पर मैदानी अमले की निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इस रूट पर अचानक संयुक्त जांच अभियान चलाया जाए तो बड़े पैमाने पर अवैध कोयला परिवहन का खुलासा हो सकता है। विशेषकर गोदरीपारा, भुकभुकी, दुबछोला और पोड़ी-बचरा मार्ग पर नाकेबंदी कर मिनी ट्रकों की जांच से पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश संभव है। यह मामला अब केवल अवैध सप्लाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक सख्ती और विभागीय मिलीभगत की परीक्षा बन गया है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, खनिज विभाग और पुलिस इस काले कारोबार पर कब बड़ी कार्रवाई करते हैं।





