खड़गवां तहसील में जप्त अवैध क्रेशर एक साल से गायब, खनिज विभाग की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

शोभित शर्मा,खड़गवां/छत्तीसगढ़। खड़गवां तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत पैनारी में संचालित अवैध क्रेशर मामले ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगभग एक वर्ष पूर्व खनिज विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए क्रेशर को सामग्री सहित जप्त किया था। मौके से मशीनरी, क्रेशर सामग्री और उपकरण जब्त कर हजारों रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
लेकिन अब यह पूरा मामला रहस्यमय मोड़ ले चुका है। जिस स्थल पर जप्तशुदा क्रेशर विभागीय सुपुर्दगी में रखा गया था, वहां से वह मशीनरी गायब बताई जा रही है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, प्रशासन द्वारा सील-जप्त किया गया क्रेशर अब मौके पर मौजूद नहीं है। हैरानी की बात यह है कि खनिज विभाग ने न तो चोरी या गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई विभागीय जांच शुरू की।
ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय चुप्पी ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है। चर्चा है कि कहीं अवैध क्रेशर संचालक और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से जप्त मशीनरी को किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट या बेच तो नहीं दिया गया। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब क्रेशर विभागीय अभिरक्षा में था तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी और यदि चोरी हुई तो एफआईआर क्यों दर्ज नहीं कराई गई।
अवैध क्रेशर संचालन पहले ही शासन को राजस्व हानि पहुंचा रहा था, अब जप्त मशीनरी का गायब होना सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और प्रशासनिक निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि जप्त क्रेशर को किसके आदेश पर हटाया गया और वर्तमान में वह कहां है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह अवैध खनन और क्रेशर माफिया को खुला संरक्षण देने जैसा होगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या खनिज विभाग इस रहस्यमय तरीके से गायब हुए जप्त क्रेशर पर कोई ठोस कार्रवाई करेगा या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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