सपा के झंडे वाला शादी कार्ड डाउनलोड करते ही ग्रुप में जुड़े सपा नेताओं के खाते से उड़ गए रुपये
As soon as the wedding card with the SP flag was downloaded, money was withdrawn from the accounts of SP leaders associated with the group

सुल्तानपुर/उत्तर प्रदेश। सावधान! शादी का निमंत्रण पत्र आपके लिए मुश्किल न पैदा कर दे। ऐसा ही कुछ उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले से सामने आया है। सुल्तानपुर में सपा नेताओं के ग्रुप में किसी ने शादी का डिजिटल कार्ड भेजा। इस कार्ड को जिसने भी डाउनलोड किया, उसके खाते से रुपये कट गए। 50 हजार से लेकर एक लाख से अधिक खाते से रुपये कटे हैं। इस ग्रुप में ज्यादातर लोग सपा नेता और कार्यकर्ता जुड़े थे।
समाजवादी पार्टी विधानसभा क्षेत्र लंभुआ के नाम से एक वॉट्सऐप ग्रुप है। इस ग्रुप में ज्यादातर सपा नेता और कार्यकर्ता जुड़े हुए हैं। ग्रुप में जुड़े जितेंद्र वर्मा उर्फ बाजीगर सदस्य ने शादी का एक डिजिटल कार्ड भेजा। शादी का कार्ड सपा के झंडे के कलर की तर्ज पर बनाया गया था। ग्रुप में जब सपा झंडा वाला शादी का कार्ड आया तो सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं से रहा नहीं गया। उन्होंने उसको डाउनलोड किया और ओपन करने लगे। शादी कार्ड ओपन करने पर उसमें तारीख 35 जुलाई 2025 लिखी थी। साथ ही स्वागत की बात के साथ शादी में आना लिखा गया था। इसके अलावा शादी के कार्ड में लिखा था कि प्यार वह मास्टर कुंजी है, जो खुशी का द्वार खोलती है।
जिस-जिस ने भी शादी का यह कार्ड ओपन किया, उसका मोबाइल हैक होता गया। उस समय किसी को कुछ भी समझ नहीं आया कि उनके साथ क्या हो रहा है, लेकिन जब मोबाइल सही हुआ और मैसेज आने लगे तो सभी की आंखें खुली की खुली रह गईं। जिन लोगों ने कार्ड ओपन किया था, उनके खाते से रुपये कट चुके थे। देहात कोतवाली क्षेत्र के केनारा ग्राम प्रधान मनीष यादव के खाते से तीन बार में 74 हजार रुपये कट गए। पंचायत सचिव लवनीत शर्मा के खाते से 90 हजार रुपये कट गए। इसके अलावा बीसापुर के रहने वाले हरिकेश यादव के खाते से 56 हजार रुपये कट गए। वहीं, समाजवादी पार्टी के यूथ ब्रिगेड के प्रदेश सचिव और हरिहरपुर के रहने वाले नवनीत यादव के खाते के करीब एक लाख रुपये कट गए। अन्य सपा नेताओं के खाते से भी रुपये कटे हैं। सपा नेताओं ने साइबर पुलिस को शिकायत दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
अगर आपके पास APK फारमेट से कोई फाइल आती है तो सावधान हो जाइए। दरअसल, यह एंड्रायड ऑपरेटिंग सिस्टम द्वारा मोबाइल ऐप्स इंस्टॉल करने के लिए किया जाता है। इस फाइल के जरिए किसी डिवाइस में ऐप इंस्टॉल किया जाता है। साइबर अपराधी इस तरह की फाइल का इस्तेमाल ठगी करने में करते हैं। इसको ऐसे बनाया जाता है कि इसको डाउनलोड करने वाले व्यक्ति का फोन, लैपटाप हैक हो जाता है और उसको अपने नियंत्रण में कर लेता है। जिसके बाद फाइल को भेजने वाला व्यक्ति जो चाहे वह कर सकता है।




