मुर्शिदाबाद हिंसा वाले इलाकों में तबाही का मंजर

पीड़ित बोले- मुस्लिमों की दुकान पर आंच नहीं, सिर्फ हिंदुओं को निशाना बनाया

  • मुर्शिदाबाद में वक्फ अधिनियम के खिलाफ हिंसा भड़की
  • हिंदू दुकानों को निशाना बनाकर उपद्रवियों ने मचाया तांडव
  • पुलिस ने क्षेत्र में 150 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया

कोलकाता/एजेंसी। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान जमकर हिंसा हुई। रविवार को बर्बादी का मंजर सड़कों पर जले हुए वाहनों, लूटे गए शॉपिंग मॉल और फार्मेसी में तोड़फोड़ के रूप में देखने को मिला। मुर्शिदाबाद में रविवार को सड़कें सुनसान रहीं। दुकानें बंद रहीं और लोग घरों के अंदर ही रहे। पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र बल धूलिया, शमशेरगंज और सुती क्षेत्रों के संवेदनशील इलाकों में गश्त कर रहे हैं। जहां पिछले दो दिनों से हिंसा जारी है। मीडिया की टीम जब धुलियान में गई तब कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें एक क्षतिग्रस्त इमारत के भीतर बम के छर्रे और फर्नीचर की राख दिखाई। इन्हें उपद्रवियों ने प्रांगण में जमा कर आग लगा दी थी। उधर, हिंसा के एक पीड़ित ने बताया कि हमला करने वाले मुस्लिम लोग थे। जिन्होंने चुन-चुन कर हिंदुओं के दुकानों में तोड़फोड़ की है। अगल-बगल मुस्लिमों के दुकान पर कोई आंच नहीं आई। सिर्फ हिंदुओं को ही निशाना बनाया गया।
एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि हम अचंभित रह गए। क्योंकि अचानक सैकड़ों लोगों का एक हथियारबंद गिरोह सामने आ गया। वे खून के प्यासे थे और चिल्ला रहे थे कि हमारे समुदाय के किसी भी सदस्य को इस क्षेत्र में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। क्योंकि हम अधिनियम के माध्यम से वक्फ भूमि को छीनने की साजिश में सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने जब उनसे गुहार लगाई तो उन्होंने हमें कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। लेकिन कई बम धमाके किए और मौके से भागने से पहले संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। पुलिस काफी देर बाद पहुंची।
मुर्शिदाबाद हिंसा के एक पीड़ित ने बताया कि मेरे घर के पास ही मेरा दुकानें हैं। प्रदर्शन के दौरान मेरी दुकान पर हमला हुआ। जब हमला शुरू हुआ तो मैंने थाने में कॉल किया, लेकिन पुलिस नहीं आई। आधे घंटे बार फिर हमला हुआ और दोबारा मैंने कॉल किया। इसी तरह दो-तीन घंटे तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि हमले में मेरी दुकान का शटर टूट गया। दुकान में कम से कम 50 लाख से अधिक का सामान था। सारे सामान गायब हो गए। इसके बाद घर का भी दरवाजा तोड़ दिया गया और सामान लूट लिया गया। चार घंटे तक लगातार उपद्रव चला, उस दौरान प्रशासन का कोई पता नहीं चला। पीड़ित ने बताया कि हमला करने वाले मुस्लिम लोग थे, जिन्होंने चुन-चुन कर हिंदुओं के दुकानों में तोड़फोड़ की है। अगल-बगल मुस्लिमों के दुकान पर कोई आंच नहीं आई। सिर्फ हिंदुओं को ही निशाना बनाया गया।

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