जम्मू कश्मीर के जेल महानिदेशक की हत्या, आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा ने ली जिम्मेदारी

जम्मू,(एजेंसी)। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी (जेल विभाग) हेमंत कुमार लोहिया की हत्या की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा की भारतीय शाखा, पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फोर्स (पीएएफएफ) ने ली हैं। 57 वर्षीय लोहिया 3 अक्टूबर को जम्मू के बाहरी इलाके में अपने घर पर मृत पाए गए। बताया जा रहा है कि हत्यारे ने पहले पुलिस अधिकारी का गला रेता और फिर उनके शव को जलाने की कोशिश भी की। पुलिस को हत्या के मामले में हेमंत लोहिया के 23 वर्षीय घरेलू सहायक यासिर अहमद पर शक है जोकि रिपोर्टों के मुताबिक अपराध को अंजाम देने के बाद भाग गया था। इसके बाद पुलिस ने कई टीमें गठित कर छापेमारी शुरू की और यासिर का स्कैच भी जारी कर दिया। इसके चलते कुछ ही घंटों के भीतर यासिर अहमद को पकड़ लिया गया। यासिर अहमद रामबन जिले के हल्ला-धंडरथ गांव का निवासी बताया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह राज्य के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। हम आपको बता दें कि हेमंत लोहिया को अगस्त महीने में ही केंद्रशासित प्रदेश के जेल महानिदेशक के रूप में पदोन्नत और नियुक्त किया गया था।

इस बीच, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (जम्मू क्षेत्र) मुकेश सिंह ने बताया है कि 1992 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी 52 वर्षीय हेमंत कुमार लोहिया शहर के बाहरी इलाके में अपने उदयवाला निवास पर मृत मिले और उनका गला रेता गया था। उन्होंने कहा कि घटना स्थल की प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि लोहिया ने अपने पैर में तेल लगाया होगा, जिनमें सूजन दिखाई दे रही थी। उन्होंने कहा कि हत्यारे ने लोहिया का गला काटने के लिए ‘केचप’ की टूटी हुई बोतल का इस्तेमाल किया और बाद में शव जलाने की भी कोशिश की। एडीजीपी मुकेश सिंह ने कहा कि अधिकारी के आवास पर मौजूद चौकीदारों ने उनके कमरे के अंदर आग लगी हुई देखी। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे तोड़ना पड़ा। उन्होंने कहा कि अपराध स्थल की प्रारंभिक जांच हत्या की ओर इशारा करती है। एडीजीपी ने कहा कि घटना स्थल से एकत्र किए गए सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध आरोपी यासिर को अपराध के बाद भागते हुए देखा गया। उन्होंने कहा, “यासिर अहमद करीब छह महीने से इस घर में काम कर रहा था..शुरुआती जांच में पता चला कि वह काफी उग्र मिजाज का व्यक्ति था और अवसाद में भी था।”

इस बीच एक आतंकवादी समूह ‘ पीएएफएफ’ ने दावा किया कि उसके “विशेष दस्ते” ने इस वारदात को अंजाम दिया है। पीएएफएफ ने एक ऑनलाइन बयान में कहा, “यह इस हिंदुत्व शासन और उसका समर्थन करने वालों को चेतावनी देने के लिए इस तरह के सनसनीखेज अभियान की शुरुआत है।” बयान में कहा गया है कि हम कभी भी और कहीं भी सटीक हमला कर सकते हैं। यह सुरक्षा व्यवस्था के साथ दौरे पर आए उनके गृह मंत्री के लिए एक छोटा-सा तोहफा है।” पीएएफएफ ने बयान में कहा है कि ईश्वर ने चाहा तो हम भविष्य में भी इस तरह के अभियान जारी रखेंगे।” वहीं एक और स्थानीय आतंकी संगठन पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट ने हेमंत कुमार लोहिया की हत्या की जिम्मेदारी ली है। हालांकि, एडीजीपी ने भी कहा है कि शुरुआती जांच में आतंकवाद का कोई पहलू सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा, “गहन जांच की जा रही है। घरेलू सहायक की मानसिक स्थिति को दर्शाने वाले कुछ दस्तावेजी सबूतों के अलावा अपराध में इस्तेमाल किया गया हथियार जब्त कर लिया गया है। उधर, जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने कहा है कि हेमंत कुमार लोहिया की हत्या की प्रारंभिक जांच में आतंकवाद का पहलू सामने नहीं आया है।

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