अब आगरा में भी जामा मस्जिद के नीचे श्रीकृष्ण की मूर्ति होने का दावा,कोर्ट में याचिका दायर

Now in Agra too there is a claim of Lord Krishna's idol under Jama Masjid, petition filed in the court

आगरा/उत्तर प्रदेश। अब आगरा में जामा मस्जिद के नीचे श्रीकृष्ण की मूर्ति होने का दावा किया है। इस मामले में कोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका पर शनिवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन जज के छुट्टी पर रहने के चलते सुनवाई टाल दी गई। अब मामले की सुनवाई 23 दिसंबर को होगी। जामा मस्जिद की सीढ़ियों के ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) से सर्वे कराने की मांग की गई है।योगेश्वर श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ट्रस्ट और श्रीकृष्ण जन्मभूमि संरक्षित सेवा ट्रस्ट की ओर से याचिका दायर की गई। याचिका में जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे श्रीकृष्ण की मूर्ति दबे होने का दावा किया गया। ये दोनों ट्रस्‍ट प्रख्यात कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर से संबंधित हैं।
आगरा की लघुवाद अदालत से इन मूर्तियों को सीढ़ियों से निकलवा कर उन्हें सौंप देने की याचना अदालत से की गई है। याचिका में दावा किया है कि 1670 में औरंगजेब ने केशवदेव मंदिर को ध्वस्त कर दिया था और उसकी मूर्ति को आगरा की जामा मस्जिद के नीचे दफन कर दिया था।
वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पहले महानिदेशक अलेक्जेंडर कनिंघम ने ‘ए टूर इन ईस्टर्न राजपूताना 1882-83’ नामक किताब लिख है। इसमें उन्‍होंने औरंगजेब द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की मूर्तियों को कुदसिया बेगम की सीढ़ियों के नीचे दबाने का उल्लेख किया है। इसके अलावा जदुनाथ सरकार ने पुस्तक ‘मआसिर-ए-आलमगीरी-ए हिस्ट्री आफ द एंपरर औरंगजेब आलमगीर’ में श्रीकृष्ण की मूर्तियों को आगरा की बेगम साहिब मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दबवाने का उल्लेख किया है।
याचिकाकर्ता ने कहा है कि सीढ़ियों पर लोगों का आना-जाना होता है, जिससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। वादी पक्ष के कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने कहा है कि समस्त सनातन धर्म की भावना की सुरक्षा के लिए जामा मस्जिद की सीढ़ियों का सर्वेक्षण किया जाना आवश्यक है, ताकि सच्चाई सामने आ सके। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विनोद शुक्ला का कहना है कि वाराणसी के जिला जज ने ज्ञानवापी मामले में वैज्ञानिक सर्वे का आदेश दिया था। राम मंदिर में एएसआई ने सर्वे किया था। एएसआई ने सूचना का अधिकार में जानकारी दी है कि आगरा की जामा मस्जिद में उत्खनन और अन्वेषण नहीं किया गया है। जामा मस्जिद का कितना भाग भूमि के नीचे दबा है, यह जीपीआर सर्वे और अन्य वैज्ञानिक विधि से जांच में ही पता चल सकेगा।

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