जम्मू-कश्मीर में पहली बार लगेगा संपत्ति कर

नेशनल डेस्क ।  जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने इस केंद्र शासित प्रदेश में संपत्ति कर लगाने की अधिसूचना जारी की है जोकि एक अप्रैल से लागू होगी। इस अधिसूचना के जारी होते ही बड़ा राजनीतिक बवाल मच गया है और जनता के बीच भी थोड़ी नाराजगी देखी जा रही है। जम्मू-कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक दलों ने संपत्ति कर लगाने के लिये उपराज्यपाल प्रशासन पर निशाना साधते हुये इस कदम को ‘जन विरोधी’ एवं ‘अलोकतांत्रिक’ करार दिया है। हम आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में पहली बार संपत्ति कर लगाया जायेगा। देखा जाये तो अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में बहुत कुछ पहली बार ही हो रहा है। जैसे हाल ही में पहली बार सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने का अभियान भी चलाया गया था।

जहां तक इस फैसले के खिलाफ आ रही प्रतिक्रियाओं की बात है तो आपको बता दें कि पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती तो इस फैसले पर इतना भड़क गयी हैं कि उन्होंने कह दिया है कि संपत्ति कर लगाने का निर्णय जम्मू-कश्मीर के लोगों को निर्धन बनाने के भाजपा के बड़े एजेंडे का हिस्सा है। महबूबा ने कहा, ‘‘इस फैसले का मुख्य लक्ष्य जम्मू-कश्मीर के लोगों को इतना निर्धन बना देना है कि वह कुछ भी नहीं मांग सकें।” उन्होंने कहा कि देश के शेष भाग को देखिये, 80 करोड़ लोग मुफ्त में राशन पा रहे हैं। वे नौकरियां एवं सस्ते ईंधन की मांग नहीं कर रहे हैं। उन्हें केवल पांच किलो अनाज का इंतजार रहता है, ताकि वह अपने बच्चों को खिला सकें। वे जम्मू कश्मीर को भी इसी स्तर पर लाना चाहते हैं।” उन्होंने कहा कि यह जम्मू-कश्मीर के लोगों को दफन करने के भाजपा के बड़े एजेंडे का हिस्सा है।’’ महबूबा ने कहा कि लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से कर अदा करने से इंकार कर देना चाहिए।

उधर, नेशनल कांफ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में संपत्ति कर थोपा जाना जन विरोधी कदम है। सादिक ने बताया, ‘‘इस प्रकार के मनमाने और जन विरोधी आदेश आगे बढ़ने का सही तरीका नहीं है। इस प्रकार के निर्णय को लेकर सबसे बेहतर यही होगा कि इसे निर्वाचित सरकार पर छोड़ दिया जाये।’’ उधर, नेशनल कांफ्रेंस के जम्मू के प्रांतीय अध्यक्ष रतन लाल गुप्ता ने संपत्ति कर लगाये जाने को ‘जजिया’ करार दिया। वहीं माकपा के वरिष्ठ नेता मोहम्मद युसूफ तारिगामी ने इसे मनमाना और अलोकतांत्रिक करार दिया। माकपा नेता ने इसे तत्काल वापस लिये जाने की भी मांग की। वहीं प्रभासाक्षी संवाददाता ने जब इस मुद्दे पर श्रीनगर में स्थानीय लोगों से बातचीत की तो उन्होंने भी प्रशासन के इस फैसले पर नाराजगी जताई।

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