मुंबई में समुद्र में हर साल जाता है 5 मिलियन किलो प्लास्टिक
रोकने के लिए लगेगा खास बैरियर

मुंबई ब्यूरो। मुंबई में समुद्र में जाने वाले प्लास्टिक कचरे को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। नीदरलैंड की गैर-लाभकारी संस्था द ओशन क्लीनअप ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (एमसीजीएम) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) के साथ मिलकर मालाड और ट्रॉम्बे के जलमार्गों पर खास बैरियर लगाने की योजना बनाई है।
इन बैरियर का उद्देश्य समुद्र में जाने से पहले प्लास्टिक कचरे को रोकना है। संस्था के मुताबिक, इन दोनों जगहों से हर साल 61 से 92 टन तक प्लास्टिक कचरा रोका जा सकेगा। यह तकनीक 2026 में तैनात की जाएगी। रिसर्च के अनुसार, भारत के तटीय इलाकों में मिलने वाले समुद्री कचरे का 80 प्रतिशत हिस्सा प्लास्टिक का है। इस परियोजना को चरणों में लागू किया जाएगा और इसकी शुरुआत मानसून से पहले की जाएगी। द ओशन क्लीनअप के सर्वे के मुताबिक, मुंबई हर साल लगभग 50 लाख किलोग्राम (5 मिलियन किलोग्राम) प्लास्टिक कचरा अरब सागर और हिंद महासागर में छोड़ता है।
इसका असर 220 किलोमीटर लंबी तटरेखा, 152 वर्ग किलोमीटर मैंग्रोव क्षेत्र, 107 संरक्षित प्रजातियों और करीब 19 लाख लोगों की आजीविका पर पड़ता है, जो तटीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर हैं। मुंबई में प्लास्टिक कचरे के मुख्य स्रोत शहरी बहाव (बारिश का पानी), औद्योगिक अपशिष्ट और कचरा प्रबंधन की कमी हैं।
द ओशन क्लीनअप के संस्थापक और सीईओ बॉयान स्लाट ने कहा कि भारत प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। उनका कहना है कि कचरे को समुद्र तक पहुंचने से पहले रोकना बेहद जरूरी है। संस्था की रिसर्च बताती है कि दुनिया की 30 लाख नदियों में से सिर्फ 1000 नदियां ही समुद्र में जाने वाले लगभग 80 प्रतिशत प्लास्टिक के लिए जिम्मेदार हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए ’30 सिटीज प्रोग्राम’ शुरू किया गया है। इसका लक्ष्य दुनिया के 30 सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले शहरी जलमार्गों में काम करके वैश्विक स्तर पर नदियों से समुद्र में जाने वाले एक-तिहाई प्लास्टिक कचरे को कम करना है। मुंबई को प्लास्टिक रिसाव की बड़ी मात्रा और उसके स्थानीय समुदायों व पर्यावरण पर असर के कारण इस कार्यक्रम में अहम स्थान दिया गया है।





