सकारात्मकता है भारतीय पत्रकारिता का आधार : आईआईएमसी महानिदेशक

मोहाली। “पत्रकारिता पश्चिम की देन है, जो नकारात्मकता पर आधारित है । भारतीय संस्कृति अथवा पत्रकारिता का आधार सकारात्मकता है। इसका उद्देश्य ही लोकमंगल है।” यह विचार भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी ने ब्रह्माकुमारीज के ‘समाधानपरक पत्रकारिता से समृद्ध भारत का निर्माण’ कार्यक्रम के पंजाब क्षेत्रीय अभियान का शुभारंभ करते हुए व्यक्त किए। इस अवसर पर पंजाब के लोक संपर्क, आवास एवं शहरी विकास मंत्री अमन अरोड़ा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. द्विवेदी ने कहा कि आज  संवाद से विवाद और विवाद से वितंडावाद की स्थिति है, लेकिन पत्रकारों को चाहिए कि वे अपने साथ-साथ समाज का भी ध्यान रखें।पत्रकारिता तभी सफल है, जब उसका उद्देश्य लोकहित व पवित्रता हो और लोग उस पर विश्वास करें। आईआईएमसी के महानिदेशक के अनुसार जब सभी दरवाजे बंद हो जाते हैं, तब भी एक द्वार खुला रहता है। यह दरवाजा पत्रकारिता का है, जिसकी ओर लोग बड़ी उम्मीद के साथ बढ़ते हैं। मीडिया सिर्फ प्रश्न ही न उठाए, बल्कि हल भी बताए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में विचार व्यक्त करते हुए पंजाब के लोक संपर्क, आवास एवं शहरी विकास मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि मीडिया में सकारात्मकता अनिवार्य है। इसी से पत्रकारिता में स्पष्टता और प्रतिबद्धता लाई जा सकती है। दृष्टिकोण व कार्य व्यवहार में पॉजिटिविटी हो, तो कोई ऐसा काम नहीं, जो संभव न हो। सच्चाई के साथ विश्वास हो, तो असंभव कुछ नहीं है।

ब्रह्माकुमारीज की इस पहल की सराहना करते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि पत्रकार बंधु जो रोशनी यहां से लेकर जा रहे हैं, उसे अपने साथियों तक भी पहुंचाएं। इस संगठन से सीखा जा सकता है कि सरल जीवनयापन से रोजमर्रा की जटिलताओं से कैसे छुटकारा पाया जा सकता है।

वरिष्ठ पत्रकार एवं ज़ी टीवी पंजाब हरियाणा हिमाचल के संपादक दीपक धीमान ने कहा कि ईश्वर ने उसी को पत्रकार बनाया है, जो पत्रकारिता की पवित्रता बनाए रखें। पत्रकार को अपने  लोभ व लालच को छोड़कर इस बारे में सोचना होगा कि भारत को समृद्ध कैसे बनाया जा सकता है।

दैनिक जागरण के संपादक (पंजाब व चंडीगढ़) अमित शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि पत्रकारिता सिर्फ पत्रकारिता है, इसमें नकारात्मकता या सकारात्मकता कुछ नहीं है। यह तो समाज का आईना है। पहले मीडिया सिर्फ समस्या उठाता था, जबकि अब समाधान  निकालने का प्रयास भी करता है।

ब्रह्माकुमारीज के राष्ट्रीय मीडिया प्रवक्ता बीके सुशांत ने कहा कि अंधेरे को कोसने की बजाय एक मोमबत्ती जलानी चाहिए। सकारात्मकता का स्रोत आध्यात्मिकता है । 90 प्रतिशत भारतीय नकारात्मकता से ओतप्रोत हैं। मानसिकता का यह अंधकार भारतीय संस्कृति और मानव मूल्यों के अवमूल्यन से आया है। मीडिया मे सकारात्मकता अभी भी है और इसे बढ़ाने में पत्रकारिता में आध्यात्मिकता का समावेश जरूरी है।

कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारीज के क्षेत्रीय समन्वयक बीके करम चंद सैनी ने किया। राजयोग केंद्र, रोपड़ की प्रभारी ब्रह्माकुमारी रमा और मोहाली राजयोग केंद्र की प्रभारी ब्रह्माकुमारी प्रेमलता ने मीडिया की भूमिका पर अपने विचार रखे। इस अवसर पर कुमारी हरवीन और रियांशी ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया।

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