पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी को झटका, संपत्ति कुर्की के आदेश पर रोक से इलाहाबाद हाई कोर्ट का इनकार

प्रयागराज/उत्तर प्रदेश। पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। संपत्तियां कुर्क किए जाने के बस्ती जिला के सेशन कोर्ट के आदेश मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया है। बस्ती की स्पेशल एमपी/ एमएलए कोर्ट ने अमरमणि को फरार घोषित कर यूपी के डीजीपी और प्रमुख सचिव गृह से उनकी संपत्तियों को जल्द से जल्द कुर्क किए जाने का आदेश दिया है। बस्ती की सेशन कोर्ट ने संपत्तियों को कुर्क किए जाने के आदेश पर अमल नहीं किए जाने पर नाराजगी भी जताई है। बस्ती की स्पेशल कोर्ट के आदेश के खिलाफ ही अमरमणि त्रिपाठी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट इस मामले पर 15 मार्च को अगली सुनवाई करेगी। मामला व्यापारी के बेटे के अपहरण से जुड़ा है। 6 दिसंबर 2001 को बस्ती के व्यापारी धर्मराज मद्धेशिया के बेटे राहुल का अपहरण हो गया था। पुलिस ने व्यापारी के बेटे को लखनऊ में अमरमणि त्रिपाठी के घर से बरामद किया था। इस मामले में अमरमणि समेत नौ लोगों को आरोपित बनाया गया था। त्रिपाठी जेल से छूटने के बाद भी इस मामले में कोर्ट में पेश नहीं हुए थे।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कन्या जूनियर हाईस्कूल बांदा से रिटायर सेविका को हर्जाने सहित बकाया वेतन न्याय हित में एकमुश्त एक लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि लोक कल्याणकारी राज्य होने के नाते सरकार चार हफ्ते में याची को भुगतान करें। कोर्ट ने कहा कि याची महिला एक जुलाई 1977 में 15 रुपये प्रतिमाह वेतन पर अंशकालिक सेविका नियुक्त की गई। 14 मई 1981 को सहायक इंस्पेक्टर स्कूल ने वेतन बढ़ाकर 165 रुपये कर दिया। फिर भी वित्तीय अनुमोदन न मिल पाने के कारण वह 15 रुपये वेतन पर काम करती रहीं। मई 1996 में वह वेतन भी रोक दिया गया। हाई कोर्ट में याचिका दायर की तो कोर्ट ने निर्णय लेने का निर्देश दिया।
2010 में यह याचिका दायर की जिसमें तय वेतन की मांग की गई। याचिका लंबित रही। वह 2016 तक कार्यरत रहते हुए 60 साल की उम्र में रिटायर हो गईं। कोर्ट ने कहा कि 35 साल तक का 165 रुपये के हिसाब से 69 हजार 300 रुपये होते हैं। उसे दो बार हाई कोर्ट आना पड़ा। इसलिए हर्जाने सहित एक लाख दिया जाए। कोर्ट ने अपने आदेश में चाणक्य के अर्थशास्त्र के श्लोक का उल्लेख किया कि प्रजा सुखे सुखं राज्ञ:, प्रजानां तु हिते हितों। यानि प्रजा के सुख में राजा का सुख निहित है। प्रजा के हित में ही उसे अपना हित दिखना चाहिए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button