कानपुर में 22 सालों से तैनात दारोगा के खिलाफ गुमनाम पत्र वायरल, लगाए गए गंभीर आरोप, हुए रिलीव

कानपुर/उत्तर प्रदेश। कानपुर कमिश्नरेट से एक बार फिर गंभीर मामला उभर कर सामने आया है। इस बार एक दारोगा के खिलाफ गंभीर आरोपों वाला पत्र वायरल हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल पत्र में आरोपी दारोगा के खिलाफ अवैध वसूली और अवैध संबंधों में फंसे होने के आरोप लगाए गए हैं। सोशल मीडिया पर मामला गरमाने के बाद दारोगा कमल किशोर अग्निहोत्री की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कानपुर पुलिस कमिश्नरेट की ओर से आरोपी दारोगा को फिलहाल रिलीव कर दिया गया है। उनके कानपुर में 22 सालों से टिके रहने की भी बात सामने आई है। इस मामले में दावा किया जा रहा है कि इस पत्र को महिला पुलिसकर्मियों की ओर से वायरल किया गया है। इसको लेकर हैरानी जताई जा रही है।
कानपुर पुलिस कमिश्नरेट अपने कारनामों के कारण हमेशा चर्चा में रहती है। अब एक बार फिर दारोगों के कारनामों ने पुलिस कमिश्नरेट को चर्चा में ला दिया है। बुधवार को पुलिस विभाग से एक गुमनाम पत्र वायरल हुआ। हैरानी बात यह कि इस पत्र को महिला पुलिस कर्मियों ने वायरल किया है। गुमनाम पत्र दारोगा कमल किशोर अग्निहोत्री के खिलाफ वायरल हुआ है। दारोगा बीते 22 वर्षों से कानपुर में तैनात थे। ट्रांसफर के बाद भी दारोगा कैसे अपने पद पर तैनात रहे? जिम्मेदार अधिकारियों की नजर उस पर क्यों नहीं गई? ये सवाल उठने लगे हैं। वायरल पत्र में दारोगा पर वसूली समेत अवैध संबंध जैसे घिनौने आरोप लगाए गए हैं। यह पत्र काफी समय से कमिश्नरेट में होने का दावा किया जा रहा है। इस मामले में जांच पूरी कराए जाने के बाद कार्रवाई की बात कही गई है।
जिले में ही चक्कर काटते रहे हैं दारोगा
दारोगा कमल किशोर अग्निहोत्री पिछले 22 सालों से कानपुर में अलग-अलग कार्यालयों में तैनात रहे हैं। अभी उनकी तैनाती एसपी मुख्यालय में थी। गुमनाम पत्र में दारोगा पर आरोप लगाए गए हैं कि बीते 22 साल से दारोगा विभिन्न कार्यालयों में जांच का काम करते थे। आरोप है कि दारोगा कमल किशोर की ओर से पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ गुमनाम पत्र डलवाए जाते थे। इसके बाद जांच के नाम पुलिसकर्मियों से पैसे की उगाही की जाती थी।
गुमनाम पत्र में दारोगा पर आरोप लगाए गए हैं कि जांच नाम पर वसूली कर उन्होंने करोड़ों की संपत्ति बना ली है। इसके साथ ही बहू और महिला सिपाहियों से अवैध संबंध के बारे में भी पत्र में दावा किया गया है। इस वायरल पत्र की एनबीटी ऑनलाइन पुष्टि नहीं करता है।
दारोगा को किया गया रिलीव
पत्र में आरोप लगाया गया है कि कमल किशोर ने दारोगा रहते हुए भी कभी थाने की पोस्टिंग नहीं ली। इस दौरान वे अधिकारियों के विश्वास का नाजायज फायदा उठाते रहे। डीसीपी मुख्यालय शिवा जी के मुताबिक कमल किशोर एसआई हैं। वह पहले कॉन्स्टेबल थे और कानपुर में 12 साल रहे। उससे पहले भी वे जीआरपी में तैनात थे। जीआरपी कानपुर में वे सीओ ऑफिस में रहे। इसके बाद दोबारा उनकी पोस्टिंग यहीं हो गई थी। उनका ट्रांसफर भी हो गया था। फिलहाल उन्हें रिलीव कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि गुमनाम पत्र के तथ्यों की जांच कराई गई है। इसके आधार पर कार्रवाई की गई है।

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