बिना टेंडर जारी किए ही बेच दिए गए जब्त सैकड़ों वाहन, 10 अधिकारियों पर केस दर्ज
11 साल से चल रहा था खेल

नई दिल्ली। बिना टेंडर जारी किए अवैध रूप से 281 जब्त वाहनों को स्क्रैपर कंपनी को बेचने के मामले में दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने निगम के शाहदरा साउथ जोन में तैनात दस अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया है।
शाहदरा साउथ जोन में उस समय तैनात रहे प्रशासनिक अधिकारी धीरज कुमार व दिनेश कुमार के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए एसीबी ने उनके मूल विभाग के अधिकारियों से अनुमति मांगी है। दोनों निगम में प्रतिनियुक्ति पर आए थे।
भ्रष्टाचार की शिकायत की जानकारी एसीबी को लगते ही दोनों अधिकारी अपने-अपने विभाग में लौट गए। इन अधिकारियों पर निगम को 22 लाख से अधिक का चूना लगाने का आरोप है। एसीबी के संयुक्त आयुक्त मधुर वर्मा का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। अभी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। जिन 12 अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है, वे उस समय निगम के शाहदरा साउथ जोन स्टोर पर तैनात थे।
फिलहाल इन सभी को निलंबित कर दिया गया है। जिन अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उनमें सुभाष चंद शर्मा, सहायक अनुभाग अधिकारी (एएसओ), एलएंडओ (लाइसेंसिंग इंस्पेक्टर), मुकेश शर्मा, सहायक सचिवालय सहायक (एसएसओ), विनय पाराशर, यशबीर सिंह, रणवीर, जेई, रविंदर मीना, जेई, रविंदर पाल, पवन कुमार, केके गुप्ता और पंकज कुमार के नाम शामिल हैं।
सचिन मीना ने एसीबी में शिकायत कर आरोप लगाया था कि निगम में तैनात प्रशासनिक अधिकारी धीरज कुमार और लाइसेंस इंस्पेक्टर पंकज कुमार ने 2010 से 2021 के दौरान जब्त किए गए 609 वाहनों को बिना किसी टेंडर के बेच दिया था। सत्यापन के दौरान पता चला कि कुल 609 जब्त वाहनों को दिसंबर 2021 में नीलामी के लिए एमसीडी शाहदरा साउथ जोन ने चिन्हित किया था और इन वाहनों की नीलामी का प्रस्ताव शुरू किया गया था लेकिन यह पूरा नहीं हो सका।
2024 में शाहदरा साउथ जोन ने 281 जब्त वाहनों को मेसर्स पाइनव्यू (स्क्रैपर) को बेच दिया। इस तरह धोखाधड़ी कर शाहदरा साउथ जोन के तत्कालीन अधिकारियों ने निगम को लाखों रुपये का चूना लगाया।




