चालान काटने की पावर किसके पास है, गाड़ी कौन जब्त कर सकता है? जान लीजिए पूरे नियम
¿Quién tiene la facultad de expedir challan y quién puede embargar el vehículo? Conoce las reglas completas

- दिल्ली में ट्रैफिक पुलिस और लोकल पुलिस वाहन चालकों को चेकिंग के लिए रोक सकती है
- ट्रैफिक पुलिस और लोकल पुलिस चालान काटने के साथ-साथ गाड़ी जब्त भी कर सकती है
- डिजिलॉकर में केवल गाड़ी की रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, बीमा और ड्राइविंग लाइसेंस रखना संभव है
- जब्त गाड़ियों की नीलामी की प्रक्रिया तब शुरू होती है जब कोई भी गाड़ी के मालिक उसे छुड़ाने के लिए 6 महीने तक नहीं आता
नई दिल्ली/एजेंसी। दिल्ली में अक्सर लोकल पुलिस या ट्रैफिक पुलिस की टीमें वाहन चालकों को चेकिंग के लिए रोकती है। कई बार पुलिस रूल वायलेट करने वालों के न केवल चालान काटती है, बल्कि उनकी गाड़ियां भी जब्त कर लेती है। ऐसे में यह जानना भी बेहद जरूरी है कि चालान काटने की पावर किसके पास है, गाड़ी कौन जब्त कर सकता है, इस दौरान क्या कार्रवाई की जाती है, किन मामलों में गाड़ी जब्त की जा सकती है और कैसे जब्त की गई गाड़ी को छुड़ाया जा सकता है।कौन से दस्तावेज जरूरी?
मोटर वीइकल एक्ट के प्रावधानों के अनुसार, प्राइवेट वीइकल जैसे कि कार, बाइक, स्कूटर के ड्राइवर के पास ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ी की आरसी, इंश्योरेंस और पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (पीयूसी) का होना जरूरी है। वहीं, कमर्शल और पैसिंजर वीइकल के मामले में फिटनेस सर्टिफिकेट, ट्रांसपोर्ट विभाग द्वारा जारी पीएसवी बैज, परमिट और अगर गाड़ी में माल भरा हुआ है, तो उसकी बिलिंग से जुड़े ओरिजनल डॉक्यूमेंट्स भी साथ होना जरूरी है।
आजकल गाड़ी के दस्तावेज सुरक्षित रखने के लिए कई लोग डिजिलॉकर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, डिजिलॉकर में केवल गाड़ी की आरसी, इंश्योरेंस और डीएल ही रखा जा सकता है। पीयूसी, फिटनेस, परमिट और पीएसवी बैज जैसे दस्तावेज वाहन चालक को ओरिजनल फॉर्मेट में साथ लेकर चलना अनिवार्य है। गाड़ी चलाते वक्त इनमें से किसी भी एक दस्तावेज का अभाव आपकी मुसीबतें बढ़ा सकता है।
गाड़ी जब्त कब हो सकती है?
प्राइवेट वीइकल के मामले में अगर कोई ड्रंकन ड्राइविंग कर रहा है या बिना लाइसेंस के गाड़ी चला रहा हो।
कमर्शल वीइकल के मामले में इन दोनों के अलावा परमिट और फिटनेस के डॉक्यूमेंट्स ना होने या आरसी नियमों का उल्लंघन करने पर
अगर कोई गाड़ी चलाते हुए हुड़दंग मचाकर कानून व्यवस्था खराब करने की कोशिश कर रहा है।
कोई नाबालिग या अनधिकृत व्यक्ति, यानी जिसके पास लाइसेंस नहीं है, पकड़े जाने पर उसकी गाड़ी भी जब्त की जा सकती है।
जब्त गाड़ियों को छोड़ने की पावर किसके पास?
लोकल पुलिस द्वारा 66-डीपी एक्ट के तहत जब्त की गई गाड़ी को तो वेरिफिकेशन करने और चालान जमा होने के बाद संबंधित क्षेत्र के एसीपी भी छोड़ सकते हैं, लेकिन ट्रैफिक पुलिस या लोकल पुलिस द्वारा एमवी एक्ट के सेक्शन-207 के तहत जब्त की गई गाड़ियों को छोड़ने की पावर केवल कोर्ट के मैजिस्ट्रेट के पास होती है। अगर आरोप गंभीर है, जैसे कि ड्रंकन ड्राइविंग या डेंजरस ड्राइविंग, तो ऐसे मामलों में कोर्ट आरोपी के गाड़ी चलाने पर कुछ समय के लिए रोक भी लगा सकती है या उसका ड्राइविंग लाइसेंस 3 से 6 महीने तक के लिए सस्पेंड या हमेशा के लिए कैंसल भी कर सकती है।
कई मामलों में जब्त की गई गाड़ियों को कोई छुड़वाने के लिए ही नहीं आता है। खासकर चोरी की गाड़ियों की बरामदगी के मामले में ऐसा अक्सर देखने को मिलता है। ऐसी गाड़ियों के मामले में पुलिस प्रोक्लेमेशन की कार्रवाई करती है। इसके तहत अगर गाड़ी जब्त होने के 6 महीने बाद भी कोई उसे क्लेम करने नहीं आता है, तो फिर गाड़ी के ओनर के रजिस्टर्ड पते पर नोटिस भेजा जाता है। नोटिस देने के बाद भी अगर ओनर नहीं आता है, तो फिर पुलिस कोर्ट से चालान रद्द करने का अनुरोध करती है। साथ ही एनसीआरबी से गाड़ी का रिकॉर्ड चेक करवाया जाता है। इसके बाद अखबारों में विज्ञापन देकर गाड़ी नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू की जाती है।




