मुनीर की ‘ईरान जाओ’ वाली टिप्पणी पर भड़के पाकिस्तान के शिया धर्मगुरु, अमेरिका की गुलामी का लगाया आरोप

इस्लामाबाद/एजेंसी। पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने कुछ दिन पहले कहा था कि जो शिया ईरान से इतना प्यार करते हैं, उन्हें वहीं चले जाना चाहिए। उनके इस बयान से सांप्रदायिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। रावलपिंडी में एक इफ्तार समारोह में की गई इस टिप्पणी को शिया मजहबी नेताओं ने अपमानजनक और भड़काऊ बताया है। प्रमुख शिया धर्मगुरुओं ने मुनीर पर समुदाय का अपमान करने और सेना पर अमेरिका और इजरायल की गुलामी करने का आरोप लगाया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शिया धर्मगुरुओं ने पाकिस्तानी सेना पर अमेरिका और इजरायल के इशारे पर पाकिस्तान के हितों के खिलाफ काम करने और सरकारों को गिराकर देश को तबाह करने का आरोप लगाया है।
शिया उलेमा काउंसिल पाकिस्तान के उपाध्यक्ष अल्लामा सैयद सिबतेन हैदर सब्जवारी ने मुनीर से कहा कि अगर आप अपने आकाओं-इजरायल और अमेरिका से इतना प्यार करते हैं, तो पाकिस्तान छोड़ दीजिए। मुनीर की शिया समुदाय को यह चेतावनी ईरान पर अमेरिकी और इजरायली आक्रमण और अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के विरोध में हुए प्रदर्शनों के बाद आई है। इस महीने की शुरुआत में कराची, स्कार्दू और इस्लामाबाद में खामेनेई की हत्या के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम-से-कम 35 लोग मारे गए थे। इन प्रदर्शनों का नेतृत्व मुख्य रूप से शिया समुदाय के लोगों ने किया। शिया समुदाय अयातुल्ला अली खामेनेई को अपना सर्वोच्च धार्मिक मार्गदर्शक (मरजा-ए-तकलीद) मानता था, जिनके फतवे उनके धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों को दिशा देते थे।
पाकिस्तान में हुए इन विरोध प्रदर्शनों के बाद ही मुनीर ने चेतावनी दी थी कि किसी दूसरे देश में हुई घटनाओं को लेकर पाकिस्तान में ¨हसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुनीर की ”ईरान जाओ” वाली टिप्पणी को पाकिस्तान के मीडिया संस्थानों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। इस टिप्पणी पर अब पाकिस्तान के शिया धर्मगुरु कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। शिया धर्मगुरु अल्लामा मुहम्मद शिफा नजाफी ने एक वीडियो जारी कर कहा-मैं आपको बता दूं, जिन्ना एक शिया थे।
शिया धर्मगुरुओं का कहना है कि ईरान को लेकर समुदाय द्वारा व्यक्त किए गए दुख और आक्रोश को पाकिस्तान के प्रति वफादारी के सवाल के रूप में देखा जा रहा है। मुनीर की चेतावनी ने उन धर्मगुरुओं को नाराज कर दिया है जो कहते हैं कि पाकिस्तानी शिया देश के इतिहास और राजनीति से गहराई से जुड़े हुए हैं और उन्हें यूं ही बाहरी या ऐसे लोग नहीं कहा जा सकता जिनकी वफादारी कहीं और है।

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