पिरामिडों के देश मिस्र में 5000 साल बाद दिखा दुर्लभ लकड़बग्घा

ग्रामीणों ने पीट-पीटकर मारा, सदमे में आए शोधकर्ता

काहिरा/एजेंसी। मिस्र में दुर्लभ चित्तीदार लकड़बग्घा देखा गया है। इस जानवर को करीब 5,000 साल बाद देखा गया है। यह दुर्लभ घटना मिस्र-सूडान सीमा के पास की है। स्थानीय लोगों ने इस लकड़बग्घे को मार डाला, जिसने शोधकर्ताओं को हैरान और निराश किया है। एक्सपर्ट का कहना है कि इस घटना ने लकड़बग्घे के निवास क्षेत्र की समझ को चुनौती दी है। इससे जलवायु परिवर्तन के कारण जानवरों के प्रवास के बारे में सवाल उठे हैं। यह दिखाता है कि जलवायु परिवर्तन जानवरों के प्रवास को कैसे प्रभावित कर सकता है।ट्रिब्यून की रिपोर्ट कहती है कि यह अद्भुत घटना 24 जनवरी, 2025 को सामने आई। मिस्र के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में वादी याहमीब पर इस चित्तीदार लकड़बग्घा को देखा गया। यह जगह मिस्र-सूडान सीमा के 19 मील दूर है। यह सूडान में चित्तीदार लकड़बग्घों के ज्ञात निवास क्षेत्र से 310 मील उत्तर में है। तकरीबन 5,000 सालों में मिस्र में इस प्रजाति का यह पहला दीदार था। स्थानीय लोगों ने लकड़बग्घे के बकरियों पर हमला करने के बाद घेरकर पकड़कर मार डाला।
मिस्र के अल अजहर विश्वविद्यालय के पारिस्थितिकीविद् अब्दुल्ला नागी ने इस पर कहा, ‘जब तक मैंने उसकी बॉडी के फोटो और वीडियो नहीं देखे, मुझे इस पर यकीन ही नहीं हुआ। यह सबूत देखकर मैं पूरी तरह से दंग रह गया। यह मिस्र में मिलने वाली किसी भी चीज से परे था। यह उद्धरण इस खोज के आश्चर्य और महत्व पर जोर देता है।
चित्तीदार लकड़बग्घे मूल रूप से उप-सहारा अफ्रीका के निवासी हैं। वे झुंड में शिकार करने वाले जानवर हैं। वे आमतौर पर अफ्रीका के विभिन्न आवासों में रहते हैं। मिस्र में इसके मिलने से सवाल है कि ये यहां कैसे पहुंचा। नागी का अनुमान है कि एक दुर्लभ मौसम और एक्टिव रेड सी ट्रफ ने इसका रास्ता खोला होगा। यह घटना तब होती है जब पूर्वी हवाएं आस-पास के पहाड़ों के ऊपर से बहती हैं। इससे तेज बारिश होती है और बाढ़ आती है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि एक्टिव रेड सी ट्रफ से जुड़ा दस साल में एक बार आने वाला मौसम चक्र मिस्र-सूडान सीमा पर अधिक वर्षा का कारण बन रहा है। इससे वन्यजीवों के लिए प्रवास का एक संभावित मार्ग बन रहा है। क्षेत्र की ऐतिहासिक उपग्रह छवियां इस बात की पुष्टि करती हैं कि हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में उल्लेखनीय पौधों की वृद्धि हुई है। इससे लकड़बग्घे को अपनी यात्रा में जीवित रहने के लिए पर्याप्त चरने वाले जानवर मिले होंगे।
चित्तीदार लकड़बग्घे लंबी दूरी की यात्रा के लिए जाने जाते हैं। वे अक्सर एक दिन में 17 मील तक की दूरी तय करते हैं। मौजूदा मामले में इस जानवर को तब ट्रैक किया गया जब उसने एल्बा संरक्षित क्षेत्र में स्थानीय लोगों की दो बकरियों को मार डाला।

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