एक गाय हर तीसरे दिन दे सकती है 30 बच्चे : स्वामी काडसिद्धेश्वर

नई दिल्ली। विज्ञान गोपालन को ज्यादा सशक्त बना रहा है। अब गाय का दूध ही नहीं बल्कि गाय के हर उत्पाद को हम पैसे में परिवर्तित कर सकते हैं। ढाई सौ साल पुराने प्राचीन मठ सिद्ध गिरी यानी कनेरी मठ से आए स्वामी अदृश्य कार्ड सिद्धेश्वर जी महाराज ने विज्ञान और गाय की संभावनाओं को लेकर गाय के अर्थशास्त्र को समझाया। उन्होंने बताया कि किस तरह से हर तीसरे दिन गाय से 30 शुक्राणु लेकर बैल के अंडाणुओं के साथ उसे एंब्रियो में तब्दील किया जा सकता है और इस तरह से अच्छी नस्ल की गायों को देश में बढ़ावा दिया जा सकता है तेजी से गैस संवर्धन किया जा सकता है साथ ही बेसहारा और दूध न देने वाली गायों की कोख को उपयोग में लाया जा सकता है।
वो संसद टीवी में पत्रकार गीतांजली राघव की पुस्तक को काऊमनी (गाय का अर्थशास्त्र) के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। इस मौके पर आरएसएस के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर ने गोपालन और स्वास्थ्य को लेकर अपने अनुभव साझा किए, साथ ही कई सफल गौशालाओं का जिक्र भी किया। कार्यक्रम में राजस्थान से आए पद्मश्री लक्ष्मण सिंह लापोड़िया ने राजस्थान में चौका प्रणाली से जल संरक्षण तथा गायों और मनुष्य के लिए भोजन की समुचित व्यवस्था पर रोशनी डाली,वहीं राजस्थान में ग्राम पर्यटन को बढ़ावा देने वाले जोर की ढाणी के संस्थापक कान सिंह निर्वाण ने गाय के अर्थशास्त्र को अपने खुद के अनुभव से साझा किया। आयुर्वेद के जरिए पशुओं का इलाज करने वाली आयुर्वेट कंपनी के आयुर्वेद के कार्यकारी निदेशक अनूप कालरा ने कहा की को आयुर्वेद और वेदों में पशु चिकित्सा के लिए तमाम उपाय बताए गए हैं, लेकिन ये ज़रूरी है कि ज्ञान और विज्ञान के बीच समन्वय स्थापित किया जाए।
पुस्तक विमोचन के साथ ही काऊमनी की लेखिका गीतांजली राघव ने पुस्तक के सारांश को आगंतुकों के साथ साझा किया। गीतांजली ने पुस्तक का सारांश प्रस्तुत करते हुए कहा कि पुस्तक में गाय के इकोसिस्टम को समझने की कोशिश की गई है और यह बताने की कोशिश की गई है कि एक समय ऐसा भी था जब गाय को अपने भोजन और पानी के लिए किसी मनुष्य के ऊपर निर्भर होना नहीं पड़ता था। तब गाय भी आत्मनिर्भर थी,ग्राम भी आत्मनिर्भर थे और लोग भी आत्मनिर्भर ही थे। पुस्तक विमोचन के अवसर पर 100 से ज्यादा लोग उपस्थित रहे।




