मुंह में 150 पिन रखकर खाते-पीते हैं संजय विश्वकर्मा, अंदर एक खरोंच भी नहीं, डॉक्टर हैरान

सतना/मध्य प्रदेश। दुनिया में शौकीनों की कमी नहीं है, लेकिन मध्य प्रदेश के सतना में रहने वाले 58 वर्षीय संजय विश्वकर्मा का शौक सुनकर अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाएं। आम इंसान अगर मुंह में एक छोटी सी फांस या कंकड़ भी फंस जाए तो बेचैन हो उठता है और निकालकर फेंक देता है। लेकिन संजय पिछले 45 सालों से अपने मुंह में लोहे और पीतल की नुकीली पिनों का जखीरा लेकर घूम रहे हैं। संजय के मुंह में हर वक्त 150 से ज्यादा पिन दबी रहती हैं। चाहे खाना खाना हो, पानी पीना हो, बात करनी हो या रात को गहरी नींद में सोना हो ये पिन कभी उनके मुंह से बाहर नहीं आतीं और न ही उन्हें कोई नुकसान पहुंचाती हैं। मेडिकल साइंस के लिए संजय किसी चलते-फिरते अजूबे से कम नहीं हैं।
संजय के पिन मैन बनने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। संजय विश्वकर्मा ने मीडिया को बताया कि यह सब वह महज 14 साल की उम्र में शुरू हुआ। उन्हें पान खाने का जबरदस्त शौक था। अक्सर पान खाते समय सुपारी उनके दांतों में फंस जाती थी। पहले वे उसे निकालने के लिए माचिस की तीली या अगरबत्ती की लकड़ी का इस्तेमाल करते थे, लेकिन वह बार-बार टूट जाती थी। परेशान होकर एक दिन उन्होंने लकड़ी की जगह लोहे की पिन का इस्तेमाल किया। यह तरीका उन्हें इतना कारगर लगा कि उन्होंने पिन को मुंह में ही दबाकर रखना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे एक पिन से शुरू हुआ यह सफर अब 150 पिनों के गोदाम तक पहुंच गया है।
हैरानी की बात यह है कि संजय के मुंह में पीतल, स्टील और लोहे की अलग-अलग डिजाइन की सैकड़ों पिन हैं, लेकिन उन्होंने आज तक एक भी पिन बाजार से नहीं खरीदी है। संजय विश्वकर्मा ने बताया कि मुझे जहां भी पिन दिखती है, मैं उठा लेता हूं। चाहे दर्जी की दुकान हो, सरकारी दफ्तर हो या किसी ऑफिस की मेज मैं चुपके से पिन उठाता हूं और सीधे मुंह में रख लेता हूं। हालांकि लोग अब अपने से पिन दे भी देते है। अब उनका मुंह ही उनका पिन बॉक्स बन चुका है।
संजय ने आगे बताया कि मुंह में नुकीली पिन होने के बावजूद उन्हें आज तक कोई तकलीफ नहीं हुई। यह पूरा वाक्या तब हुआ जब जबलपुर के एक अस्पताल में उनकी जांच कराई गई। डॉक्टर्स ने जांच में पाया कि संजय जिस तरफ से पान चबाते हैं, वहां चूने की वजह से गाल और दांत गल चुके हैं और नुकसान हुआ है। लेकिन, मुंह के जिस हिस्से में वे 150 पिन दबाकर रखते हैं, वहां खरोंच का एक निशान भी नहीं है। वह हिस्सा पूरी तरह सुरक्षित है। यह देखकर डॉक्टर्स भी इसे मेडिकल साइंस की पहेली मान रहे हैं।
इसके साथ ही संजय ने मीडिया से बातचीत के दौरान आगे बताया कि एक बार वे हवाई यात्रा कर रहे थे। एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी चेक के दौरान उन्हें पसीना आ गया। उन्हें डर था कि कहीं मेटल डिटेक्टर उनके मुंह के अंदर छिपी पिनों को पकड़ न ले और सुरक्षाकर्मी उन्हें पिन उगलने पर मजबूर न कर दें। हालांकि, किस्मत अच्छी थी कि वे बिना बीप की आवाज आए वहां से निकल गए।
शुरुआत में परिवार और माता-पिता ने इस खतरनाक शौक का विरोध किया था, लेकिन अब यह उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। मुंह में 150 पिन दबाने वाले संजय विश्वकर्मा के परिवार की बात करें तो उनके एक बेटा शिवांश विश्वकर्मा और एक बेटी शिवानी विश्वकर्मा है। उनको पत्नी नीलू विश्वकर्मा ने कहा कि न तो उन्हें पिन से समस्या है और न ही अपने पति संजय से।

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