अखिलेश यादव का बाबरी विध्वंस पर क्या है दरगाह वाला मोह, डिंपल-जया बच्चन बेहद खुश

लखनऊ/एजेंसी। उत्तर प्रदेश के अयोध्या (फैजाबाद) जिले में स्थित बाबरी मस्जिद विध्वंस को भले ही सालों बीते गए हैं, लेकिन 6 दिसंबर की तारीख आते ही यादें ताजा हो जाती है। बाबरी विध्वंस को लेकर देश में दो तरह की बाते कही जाती रही है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज का दिन तो बहुत महत्वपूर्ण है, विवादित ढांचा को हटाने का भी दिन है, स्वाभाविक रूप से एक कलंक हटा है। वहीं आज के दिन ही सपा मुखिया अखिलेश यादव ने शेख सलीम चिश्ती की दरगाह पर चादर चढ़ाने को चुना। यहां वो अपनी और सांसद डिंपल यादव और जय बच्चन के साथ पहुंचे। अब इसको कई राजनीति एंगल से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं बाबरी विध्वंस के साथ अखिलेश यादव के पिता सपा संस्थापक मुलयाम सिंह यादव को भी याद किया जाता रहा है।
दरअसल सपा मुखिया अखिलेश यादव पत्नी डिंपल यादव और जया बच्चन के साथ फतेहपुर सीकरी में शेख सलीम चिश्ती की दरगाह पर पहुंचे थे। अखिलेश यादव ने दरगाह पर चादर चढ़ाकर देश की तरक्की, अमन-चैन, भाई-चारे के लिए दुआ मांगी है। साथ ही बुलंद दरवाजा समेत ऐतिहासिक इमारतों का भी दीदार किया है। इस मौके पर सपा मुखिया ने कहा कि फतेहपुर सीकरी हमारी मिली-जुली संस्कृति की याद दिलाता है। हम लोग मिलजुल कर रहते रहे हैं।
अखिलेश यादव ने कहा कि हमारे हिंदुस्तान की यही पहचान है कि अलग-अलग जाति-धर्म के लोग मिलकर साथ रहते है। शेख सलीम चिश्ती की दरगाह की लोगों में बहुत आस्था है। इस दरगाह को पूरी दुनिया में बहुत सम्मान से देखा जाता है। इसकी सदियों से पहचान है। हमने यहां कामना की है कि हमारी हिंदुस्तानियत, मिली-जुली संस्कृति और एक-दूसरे के प्रति लगाव और भाईचारा प्रेम बढ़े। सपा मुखिया ने दरगाह में चादर चढ़ाते समय की फोटो एक्स पर साझा की है, जिसकर लोग अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं।
एक यूजर ने अखिलेश यादव को नसीहत देते हुए लिखा कि आज के दिन तो रुक जाते। आज आपको राम मंदिर जाना चाहिए था, लेकिन पहुंच सीकरी गए हैं। यूजर ने कहा कि यूपी का हिंदू सब देख रहा है और इस बार एक मुश्त वोट करेगा, देखते जाओ। हालांकि अखिलेश यादव के आज के दिन दरगाह जाने पर राजनीति शुरू हो गई है।
अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव पर कारसेवकों पर गोली चलवाने का आरोप लगा था, जिसके बाद उन्हें मुल्ला मुलायम तक कहा गया था। अखिलेश यादव भी अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद से नहीं गए हैं। इसको लेकर भी सवाल उठते रहे है। हालांकि बाबरी मस्जिद विध्वंस के दिन दरगाह जाकर अखिलेश यादव ने राजनीति को गरमा दिया है।
बता दें, जैसे-जैसे 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है समाजवादी पार्टी अपने मूल वोट बैंक को अपने पहले में लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। खास कर मुस्लिम समुदाय को एकजुट कर सपा मुसलमान को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है। यही वजह है कि अखिलेश यादव विशेष तौर पर आज के दिन राम मंदिर न जाकर दरगाह गए हैं। वैसे भी अखिलेश यादव समय-समय पर मुसलमानों की आवाज उठाते रहे हैं, चाहे एसआईआर का मामला हो या फिर आजम खान समेत तमाम मुस्लिम नेताओं के खिलाफ हो रही कार्रवाई का मामला। ऐसे में सपा मुखिया ने दरगाह जाकर सियासी मैसेज भी दे दिया है।
कारसेवक गोलीकांड और मुलामय सरकार
अयोध्या गोलीकांड के बाद हुए विधानसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव को हार का सामना करना पड़ा था। बताया जाता है कि 2 नवंबर 1990 को जब कारसेवकों ने अयोध्या में विवादित ढांचे को गिराने की कोशिश की थी, उस वक्त मुलायम सिंह यादव यूपी के मुख्यमंत्री थे। बाबरी मस्जिद को बचाने के लिए पुलिस ने कारसेवकों पर फायरिंग की थी, जिसमे 16 लोगों की मौत होने का दावा किया जाता है।
इस पर पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने साल 2016 में कहा था कि अयोध्या में गोली चलने से 16 जानें गईं, अगर 30 भी जाती तो देश की एकता और अखंडता के लिए मुझे मंजूर था। अयोध्या में एकता बचाने के लिए गोली चलानी पड़ी थी।
इस घटनाक्रम के बाद मुलायम सिंह यादव की एक अलग छवि बन गई थी। उन्हें मुसलमानों का नेता कहा जाने लगा था। यहां तक कि उन्हें मुल्ला मुलायम से भी संबोधित किया जाने लगा था। तब से मुसलमान सपा के साथ है और कई चुनाव में सरकार बनवाने में मदद किया है। मुलायम सिंह यादव या फिर अखिलेश यादव मुसलमानों को अपने पाले में लाने की कोशिश करते रहे हैं। अखिलेश यादव ने बाबरी मस्जिद विध्वंस के दिन दरगाह जाकर एक बड़ा मैसेज देने का काम किया है। अखिलेश यादव ने पीडीए का नारा दिया है जिसमें A से अल्पसंख्यक हैं।

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