जम्मू के बसोहली की ऐतिहासिक रामलीला के लिए रिहर्सल तेज, 1912 से चली आ रही परंपरा में दिखा उत्साह
बसोहली में ऐतिहासिक रामलीला की तैयारियां जोरों पर हैं, जहाँ कलाकार बिना किसी पारिश्रमिक के रामायण के पात्रों को जीवंत कर रहे हैं। यह 114 साल पुरानी परंपरा क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

बसोहली,जम्मू। ऐतिहासिक रामलीला के आयोजन को लेकर तैयारियां इन दिनों जोर पकड़ने लगी हैं। आयोजन की तारीखें नजदीक आने के साथ ही रामलीला मैदान में कलाकारों की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। शाम ढलते ही कलाकार रिहर्सल के लिए पहुंचने लगते हैं और रात आठ बजे से देर रात तक रामायण के विभिन्न प्रसंगों, संवादों, अभिनय और गीतों का अभ्यास चलता है। रामलीला क्लब के कार्यालय से देर रात तक सुनाई देने वाले रामायण के मधुर गीत पूरे वातावरण को भक्तिमय और सांस्कृतिक रंग में रंग रहे हैं।
बसोहली की रामलीला केवल धार्मिक आयोजन या मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। वर्ष 1912 में यहां पहली बार रामलीला का मंचन किया गया था। इसके बाद यह परंपरा लगातार आगे बढ़ती रही और अब इसे सौ वर्ष से अधिक समय हो चुका है। इस आयोजन ने कई पीढ़ियों को स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और भगवान श्रीराम के आदर्शों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
रामलीला की तैयारियों में अनुभवी और वरिष्ठ कलाकार भी पूरी सक्रियता के साथ जुटे हैं। वे नए और युवा कलाकारों को संवाद बोलने की शैली, भाव-भंगिमाओं, पात्रों के अनुरूप अभिनय और मंच पर प्रस्तुति के तौर-तरीकों की बारीकियां समझा रहे हैं। रामायण के प्रत्येक प्रसंग की गंभीरता और पात्रों की भूमिका को समझाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि मंचन के दौरान कलाकार अपने किरदार को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर सकें।
बसोहली की रामलीला की खास विशेषता इसका खुले मैदान में आयोजन है। खुले वातावरण में दर्शकों के बीच रामायण के प्रसंगों का मंचन स्थानीय लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान और रावण समेत विभिन्न पात्रों के माध्यम से रामायण की कथा को मंच पर जीवंत किया जाता है। इस दौरान कलाकारों और दर्शकों के बीच भी एक अलग तरह का जुड़ाव देखने को मिलता है।
इस रामलीला की एक उल्लेखनीय विशेषता कलाकारों का सेवा और समर्पण भाव भी है। आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार, कलाकार अपने किरदार निभाने के लिए किसी प्रकार का पारिश्रमिक नहीं लेते। वे अपनी रुचि, श्रद्धा और सांस्कृतिक परंपरा के प्रति समर्पण के साथ रामलीला में हिस्सा लेते हैं। रामलीला क्लब से जुड़े सदस्य भी आयोजन को सफल बनाने के लिए श्रमदान, आर्थिक सहयोग और व्यवस्थाओं में अपनी भागीदारी निभाते हैं।
इन दिनों रामलीला क्लब के कार्यालय में देर रात तक कलाकारों की रिहर्सल चल रही है। रामायण के प्रसंगों से जुड़े गीतों के साथ संवाद, सुर, ताल, शब्दों के उच्चारण और अभिनय की लगातार तैयारी की जा रही है। कलाकार अपने-अपने पात्रों को बेहतर ढंग से निभाने के लिए छोटी-छोटी बारीकियों पर भी मेहनत कर रहे हैं।
रामलीला आयोजन के दिन जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, वैसे-वैसे बसोहली में उत्साह भी बढ़ता जा रहा है। रिहर्सल से लेकर मंच और अन्य व्यवस्थाओं तक, आयोजन से जुड़े लोग इसे सफल बनाने में जुटे हैं। देर रात तक गूंजते रामायण के गीत और संवाद इस बात का संकेत दे रहे हैं कि ऐतिहासिक रामलीला का मंचन शुरू होने से पहले ही बसोहली का वातावरण धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उत्साह से सराबोर होने लगा है।




