एयरपोर्ट वाले शहर में आसमान छूती इमारतों के बीच हिंडन पार करने को नाव का सहारा, दो युवक डूबे

हिंडन नदी के दोनों तरफ घनी आबादी है। नदी के एक तरफ ग्रेनो वेस्ट तो दूसरी ओर नोएडा का सेक्टर-63 है। ग्रेनो वेस्ट के लोग नाव से नौकरी करने सेक्टर 63 जाते हैं।

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा में विकास की तस्वीर तेजी से बदल रही है। 40 मंजिला ऊंची इमारतें, 450 मीटर लंबा वातानुकूलित स्काईवॉक, दौड़ती मेट्रो और जेवर में तैयार नोएडा एयरपोर्ट क्षेत्र के आधुनिक विकास की पहचान बन चुके हैं। लेकिन इसी चमक-दमक के बीच हिंडन नदी के किनारे विकास का एक दूसरा चेहरा भी दिखाई देता है, जहां आज भी लोगों को नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। सुरक्षित और स्थायी संपर्क मार्ग के अभाव में स्थानीय लोगों की आवाजाही अस्थायी साधनों पर निर्भर है।
इसी मजबूरी के बीच शनिवार को यूसुफपुर चक गांव में एक दर्दनाक हादसा हो गया। हिंडन नदी पार करते समय दो युवक डूब गए। हादसे के बाद राज्य आपदा मोचन बल और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमें लगातार दोनों युवकों की तलाश में जुटी हैं, लेकिन 24 घंटे बीतने के बाद भी उनका कोई सुराग नहीं मिल सका है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी चिंता और आक्रोश है। लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से नदी पर स्थायी पुल बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां हिंडन नदी के दोनों किनारों पर घनी आबादी बसी हुई है। नदी के एक ओर ग्रेटर नोएडा वेस्ट का तेजी से विकसित होता क्षेत्र है, जबकि दूसरी ओर नोएडा का सेक्टर-63 स्थित है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए सेक्टर-63 और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में आते-जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, नाव के जरिए नदी पार करना उनके लिए समय और धन बचाने के साथ ही सड़क मार्ग पर लगने वाले जाम से बचने का भी एक आसान विकल्प है।
हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब ग्रेटर नोएडा वेस्ट में लगातार नई सोसायटियां और व्यावसायिक क्षेत्र विकसित हो रहे हैं, तब हिंडन नदी के दोनों किनारों को जोड़ने के लिए सुरक्षित और स्थायी संपर्क व्यवस्था क्यों नहीं की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी पार करने के लिए यदि नाव का इस्तेमाल नहीं करें तो उन्हें कई किलोमीटर दूर बने पुल तक जाना पड़ता है। इससे आने-जाने में अतिरिक्त समय लगता है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
हिंडन नदी के आसपास रहने वाले लोगों के लिए नदी पार करना रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से यहां पुल बनाए जाने की मांग की जा रही है। कई बार संबंधित अधिकारियों के सामने भी समस्या रखी गई, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। लोगों का यह भी सवाल है कि यदि नदी पार कराने के लिए नाव का संचालन किया जा रहा है तो यात्रियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए हैं।
शनिवार को हुए हादसे में डूबे युवकों की पहचान बुलंदशहर निवासी 19 वर्षीय शिव राजपूत और 20 वर्षीय सौरभ के रूप में हुई है। दोनों यूसुफपुर चक गांव में रह रहे थे। बताया गया कि दोनों युवक नाव में रस्सी बांधने का काम कर रहे थे। इसी दौरान शिव नदी में डूबने लगा। उसे बचाने के लिए सौरभ भी पानी में कूद गया, लेकिन कुछ ही देर बाद वह भी डूब गया।
घटना की सूचना मिलने के बाद बचाव दल मौके पर पहुंचा और नदी में तलाशी अभियान शुरू किया गया। राज्य आपदा मोचन बल और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमें लगातार नदी में दोनों युवकों की तलाश कर रही हैं। गोताखोरों और बचाव दलों की मदद से संभावित स्थानों पर तलाश की जा रही है, लेकिन 24 घंटे बाद भी दोनों युवकों का पता नहीं चल पाया है।
हादसे ने एक बार फिर ग्रेटर नोएडा के तेजी से हो रहे शहरी विकास और बुनियादी संपर्क सुविधाओं के बीच मौजूद अंतर को सामने ला दिया है। एक ओर क्षेत्र में आधुनिक परिवहन और ऊंची इमारतों के साथ विकास की नई तस्वीर दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी ओर नदी पार करने के लिए लोगों को अब भी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थायी पुल बनने से न केवल रोजाना नदी पार करने वाले लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि इस तरह के हादसों का खतरा भी कम होगा। अब हादसे के बाद लोगों की निगाहें प्रशासन की ओर हैं कि उनकी वर्षों पुरानी पुल की मांग पर कब ठोस कदम उठाया जाता है।

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