गाजियाबाद में पीएम आवास योजना के घर आवंटित हुए, पर नहीं मिला कब्जा

Homes under PM Awas Yojana were allotted in Ghaziabad, but possession was not given

गाजियाबाद ब्यूरो। पीएम आवास योजना के तहत लोगों को घरों का आवंटन एक साल पहले ही कर दिया गया था। मगर अभी तक एक भी आवंटी को कब्जा नहीं दिया जा सका है। अब तो यह सवाल उठने लगा है कि आवंटियों को पीएम आवास योजना के तहत घर कब मिलेगा। इसको लेकर आवंटी आए दिन जीडीए पहुंचकर सवाल करते हैं, लेकिन उन्हें कोई सटीक जवाब नहीं मिलता। जीडीए की तरफ से मधुबन बापूधाम आवासीय योजना के तहत भवनों को तैयार कर दिया गया है। मगर वहां पर बाहरी विकास कार्य पूरा नहीं होने के कारण कब्जा नहीं दिया जा सका।
इस संबंध में जीडीए की तरफ से शासन स्तर पर कई बार पत्राचार किया जा चुका है। मगर इस संबंध में कोई फाइनल जवाब नहीं आया है। हां इतना जरूर कहा गया है कि यदि संबंधित विभाग की तरफ से काम नहीं करवाया जा रहा है कि जीडीए अवस्थापना निधि के माध्यम से विकास कार्य करवाएगा। मालूम हो कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आवास योजना प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को एक भी फ्लैट नहीं दिया गया है। यह योजना 2015 में शुरू की गई थी।
गाजियाबाद में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जीडीए 3550 यूनिट और निजी डेवलपर्स द्वारा 6150 यूनिट का निर्माण किया जा रहा है। जीडीए का कहना है कि मधुबन बापूधाम आवासीय योजना और डासना जैसी उसकी आवासीय योजनाओं में 2000 से अधिक यूनिट बनकर तैयार हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव के कारण कब्जा नहीं दिया जा सका है।
बता दें कि बाहरी विकास कार्य जैसे बिजली, पानी, सीवर कनेक्शन और पहुंच मार्ग का काम संबंधित विभागों और एजेंसियों द्वारा किया जाना है और ऐसा नहीं किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप इकाइयों को लाभार्थियों को नहीं सौंपा जा सका है। जीडीए की मधुबन बापूधाम आवासीय योजना में 856 यूनिट का निर्माण हो रहा है, जबकि डासना में 432 यूनिट का निर्माण हो रहा है। प्रताप विहार में 1200 यूनिट का निर्माण हो रहा है और नूर नगर में 400 यूनिट का निर्माण हो रहा है।
इस योजना के तहत शहर में निजी डेवलपर्स की विभिन्न परियोजनाओं में 6150 भवनों का निर्माण किया जा रहा है। उनकी तरफ से कुछ जगह पर निर्माण कार्य शुरू करवाया गया। जबकि कुछ ने निर्माण कार्य नहीं किए, जिसके चलते उनका लाइसेंस भी निरस्त किया जा चुका है। फिलहाल जीडीए के अधिकारियों का कहना है कि निजी विकासकर्ता द्वारा निर्माण की जाने वाली इकाइयों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। नियमित रूप से निजी डेवलपर्स से पीएमएवाई की स्थिति के बारे में डिटेल रिपोर्ट ली जा रही है।
फरवरी 2021 में जीडीए बोर्ड ने प्रत्येक पीएमएवाई आवास इकाई की लागत चार लाख रुपये से बढ़ाकर छह लाख रुपये करने की मंजूरी दी थी। केंद्र सरकार का हिस्सा 2.5 लाख रुपये है, जबकि राज्य सरकार का हिस्सा 1 लाख रुपये है। वहीं, लाभार्थी को 2.5 लाख रुपये वहन करने होंगे।
राज्य और केंद्र सरकार किश्तों में पैसा जारी करती है, 25% शुरुआत में, 25% प्लिंथ बिछाने के समय, 25% सीलिंग का काम पूरा होने के बाद और बाकी 25% काम पूरा होने के बाद। इससे पहले सरकार ने पीएमएवाई के तहत गाजियाबाद के लिए 36000 इकाइयों का लक्ष्य रखा था, जिसे 2022 तक पूरा किया जाना था। मगर बाद में इसकी संख्या में कमी कर दी गई।

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