भूखे के चेहरे पर मुस्कान लाना ही सच्ची सेवा, बृज की रसोई के अभियान में श्रीरामकथा समिति ने बढ़ाया सहयोग का हाथ

जरूरतमंदों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित ‘बृज की रसोई’ अभियान में श्रीरामकथा ज्ञानयज्ञ समारोह समिति ने पूड़ी-सब्जी उपलब्ध कराकर सहयोग किया। संस्था के संस्थापक विपिन शर्मा ने कहा कि भूखे को भोजन कराना मानवता की सच्ची सेवा है। अभियान में जालिम सिंह, संजय श्रीवास्तव, अनुराग दुबे, आशीष श्रीवास्तव सहित कई स्वयंसेवकों ने योगदान दिया।

लखनऊ,उत्तर प्रदेश। किसी जरूरतमंद की भूख मिटाना केवल भोजन देना नहीं, बल्कि उसके प्रति संवेदना, अपनत्व और इंसानियत का भाव प्रकट करना है। इसी मानवीय सोच के साथ इण्डियन हेल्पलाइन सोसाइटी का सेवा प्रकल्प ‘बृज की रसोई’ जरूरतमंदों तक निःशुल्क भोजन पहुंचाने का अभियान चला रहा है। इस पहल का उद्देश्य है कि आर्थिक अभाव के कारण किसी व्यक्ति को भूखा न सोना पड़े और समाज में सेवा, करुणा तथा आपसी सहयोग की भावना मजबूत हो।
इस सेवा अभियान में श्रीरामकथा ज्ञानयज्ञ समारोह समिति, सेक्टर-आई, एलडीए कॉलोनी, कानपुर रोड ने पूड़ी-सब्जी उपलब्ध कराकर सहयोग किया। समिति के सहयोग से तैयार भोजन का वितरण बृज की रसोई के स्वयंसेवकों ने जरूरतमंदों के बीच किया। इस पहल ने यह संदेश दिया कि मानवता की सेवा के लिए बड़े संसाधनों से अधिक जरूरी है दूसरों के दुख-दर्द को समझने और उनकी मदद के लिए आगे आने का भाव।
बृज की रसोई के संस्थापक विपिन शर्मा ने कहा कि भूखे व्यक्ति को भोजन कराना सबसे सहज और सार्थक सेवा कार्यों में से एक है। जब समाज के लोग मिलकर किसी जरूरतमंद की थाली भरते हैं, तो वे केवल उसकी भूख नहीं मिटाते, बल्कि उसके जीवन में सम्मान, भरोसे और उम्मीद का भाव भी जगाते हैं। उन्होंने कहा कि सेवा का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचे।
उन्होंने श्रीरामकथा ज्ञानयज्ञ समारोह समिति के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि धार्मिक, सामाजिक और स्वयंसेवी संस्थाओं की सहभागिता से सेवा कार्यों को नई शक्ति मिलती है। समाज का हर सक्षम व्यक्ति अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग करे, तो जरूरतमंदों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
इस सेवा अभियान में जालिम सिंह, संजय श्रीवास्तव, अनुराग दुबे, आशीष श्रीवास्तव, बलवंत सिंह, विकास पांडेय, दीपक भुटियानी, अखिलेश सिंह, मुकेश कनौजिया और उमाशंकर यादव सहित अनेक स्वयंसेवकों ने सक्रिय योगदान दिया।

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