‘थारा फूफा अभी जिंदा है’ कहकर व्यवस्था को जगाने वाले दुलीचंद का निधन, 106 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
हरियाणा के रोहतक निवासी दुलीचंद का 106 की उम्र में निधन हो गया है। 2022 में पेंशन बंद होने के बाद उन्होंने अपनी बारात निकाली थी। बारात जीवित होने की गवाही देने के लिए निकाली थी। इस दौरान उनके हाथ में तख्तियां थीं, जिस पर लिखा था कि थारा फूफा जिंदा है।

रोहतक, हरियाणा। हरियाणा में अपनी अनोखी बारात के जरिए सरकारी व्यवस्था का ध्यान खींचने वाले दुलीचंद का 106 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। रोहतक जिले के गांधरा गांव निवासी दुलीचंद ने शनिवार को अंतिम सांस ली। रविवार को गांव में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। उनके निधन के बाद एक बार फिर उनकी चर्चित बारात और ‘थारा फूफा अभी जिंदा है’ का नारा चर्चा में आ गया है।
दुलीचंद उस समय सुर्खियों में आए थे, जब करीब 102 वर्ष की उम्र में उनकी पेंशन बंद हो गई थी। बताया गया कि जीवन प्रमाण पत्र से जुड़ी समस्या के कारण सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत मान लिया गया था, जबकि वह जीवित थे। अपनी पेंशन दोबारा शुरू कराने और अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए उन्होंने एक अनोखा तरीका अपनाया। दुलीचंद दूल्हे की तरह रथ पर सवार होकर बारात लेकर निकले और हाथों में ऐसी तख्तियां उठाईं, जिन पर लिखा था—‘थारा फूफा अभी जिंदा है’ और ‘मैं जिंदा हूं।’
दुलीचंद की यह बारात केवल एक अनोखा प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड में हुई गड़बड़ी के कारण आम नागरिक को होने वाली परेशानी की ओर ध्यान खींचने का प्रयास भी थी। वह अपनी बारात लेकर उपायुक्त कार्यालय पहुंचे थे, ताकि संबंधित अधिकारियों को यह बता सकें कि वह जीवित हैं और उन्हें पेंशन मिलनी चाहिए। उनकी इस अनूठी पहल की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुए और देखते ही देखते वह इंटरनेट पर चर्चित हो गए।
दुलीचंद की कहानी ने उम्रदराज लोगों के लिए सरकारी योजनाओं और दस्तावेजी प्रक्रियाओं से जुड़ी समस्याओं पर भी ध्यान आकर्षित किया। जिस उम्र में अधिकांश लोग आराम की जिंदगी बिताना चाहते हैं, उस उम्र में दुलीचंद को अपनी पहचान और पेंशन के लिए सार्वजनिक रूप से आवाज उठानी पड़ी। उनकी बारात ने यह संदेश दिया कि सरकारी रिकॉर्ड में हुई गलती किसी व्यक्ति के जीवन और सम्मान को प्रभावित कर सकती है।
उनके चर्चित होने के बाद उनकी जिंदगी पर एक फिल्म बनाए जाने की भी खबर सामने आई थी। हालांकि, इस फिल्म को लेकर विवाद हुआ। दुलीचंद ने कथित तौर पर आपत्ति जताई थी कि उनकी अनुमति के बिना उनके जीवन पर फिल्म बनाई गई। इस घटनाक्रम ने उनकी कहानी को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया था।
दुलीचंद अपने पीछे बड़ा परिवार छोड़ गए हैं। जानकारी के अनुसार, उनके छह बेटे और चार बेटियां हैं तथा परिवार में करीब 70 सदस्य हैं। उनके निधन से परिवार में शोक का माहौल है। गांव के लोगों ने भी उन्हें याद किया। दुलीचंद अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन अपनी पहचान साबित करने के लिए निकाली गई उनकी अनोखी बारात और ‘थारा फूफा अभी जिंदा है’ का नारा लंबे समय तक लोगों को सरकारी व्यवस्था की जटिलताओं और आम नागरिक की परेशानी की याद दिलाता रहेगा।




