आगरा में सपा प्रत्याशी आकाश अग्रवाल भावुक होकर रोए, बोले—‘मुझे नहीं बनना एमएलसी’
आगरा शिक्षक एमएलसी चुनाव में सपा प्रत्याशी आकाश अग्रवाल ने बूथ कैप्चरिंग और समर्थकों को धमकाने के आरोप लगाए। शिकायत के बाद मीडिया से बातचीत में वह रो पड़े और एमएलसी नहीं बनने की बात कही।

आगरा,उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के आगरा खंड शिक्षक विधान परिषद चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी आकाश अग्रवाल ने मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए बूथ कैप्चरिंग, कॉलेज संचालकों और शिक्षकों को धमकाने तथा उनके संस्थानों में पुलिस भेजे जाने के आरोप लगाए हैं। शिकायत लेकर मंडलायुक्त एवं चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी नगेंद्र प्रताप से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते समय आकाश अग्रवाल भावुक हो गए और कैमरे के सामने रो पड़े।
शुक्रवार को आगरा खंड शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान के दौरान फतेहाबाद, खेरागढ़ और मथुरा के छाता समेत कुछ स्थानों से हंगामे और बूथ कैप्चरिंग की शिकायतें सामने आईं। इन घटनाओं से जुड़े कुछ वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए। सपा प्रत्याशी ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर चुनाव प्रभावित करने और अपने समर्थकों व कॉलेज संचालकों को परेशान करने का आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आकाश अग्रवाल ने कहा कि उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है, मानो वह कोई आतंकवादी हों। उन्होंने आरोप लगाया कि अग्रवाल समाज के कॉलेज संचालकों और शिक्षकों को परेशान किया जा रहा है तथा उनके संस्थानों में पुलिस भेजकर दबाव बनाया जा रहा है। भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि चुनाव लड़ने पर इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने साफ कहा कि अब उन्हें एमएलसी नहीं बनना और उनके परिवार व समर्थकों को परेशान करना बंद किया जाए।
अपने बयान में आकाश अग्रवाल ने धर्म परिवर्तन की बात भी कही। उन्होंने कहा कि सनातनी होने के बावजूद उन्हें जिस तरह परेशान किया जा रहा है, उससे वह आहत हैं और अगले महीने लखनऊ की शाही ईदगाह में धर्म परिवर्तन करने जाएंगे। उन्होंने कहा कि उनके लिए चुनाव में हार-जीत मायने नहीं रखती और उन्हें अपनी पसंद की पार्टी से चुनाव लड़ने का अधिकार है।
सपा प्रत्याशी ने चुनावी माहौल पर सवाल उठाते हुए इसे अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति बताया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चाहे तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज सकती है, लेकिन वह इससे डरने वाले नहीं हैं। उनके आरोपों पर संबंधित पक्ष का जवाब और शिकायतों की आधिकारिक जांच का विवरण सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।




