कश्मीर के ऊंचे इलाकों में मौसम की पहली बर्फबारी, गुलमर्ग से जोजिला तक बिछी सफेद चादर

जम्मू-कश्मीर के कई ऊंचे इलाकों में इस मौसम की पहली बर्फबारी हुई है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों का अलर्ट जारी किया है। कश्मीर आने वाले यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए अडवाइजरी भी जारी की गई है।

श्रीनगर,एजेंसी। जम्मू-कश्मीर के कई ऊंचाई वाले इलाकों में पिछले 24 घंटों के दौरान इस मौसम की पहली बर्फबारी दर्ज की गई है। गुलमर्ग, सोनमर्ग, पहलगाम, जोजिला दर्रा, राजदान दर्रा और सिंथन टॉप सहित कई पर्वतीय क्षेत्रों में ताजा हिमपात से नजारे बदल गए हैं। बर्फबारी के बाद मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान भी खराब मौसम की संभावना जताई है। पर्यटकों और यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
मंगलवार को हुई बर्फबारी ने गुलमर्ग पहुंचे पर्यटकों को खासा उत्साहित कर दिया। बर्फ की सफेद चादर से ढके पर्यटन स्थल पर पर्यटक बर्फ के गोले बनाते, खेलते और नाचते नजर आए। कई पर्यटकों ने कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता और पहाड़ों के मनमोहक दृश्यों की सराहना की। कुछ युवाओं ने कहा कि उन्होंने पहली बार अपने सामने बर्फबारी होते देखी है।
गुलमर्ग के अलावा सोनमर्ग और पहलगाम जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के ऊंचाई वाले हिस्सों में भी रात के दौरान हल्की से मध्यम बर्फबारी हुई। जोजिला मार्ग, गुरेज घाटी के तुलैल क्षेत्र और उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले में स्थित राजदान दर्रे पर भी ताजा हिमपात दर्ज किया गया। पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश के चलते घाटी के तापमान में गिरावट आई है।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में बारिश और बर्फबारी जारी रहने की संभावना है। पूर्वानुमान के मुताबिक, 15 अक्टूबर की दोपहर से मौसम में सुधार हो सकता है और इसके बाद अगले दस दिनों तक आमतौर पर शुष्क मौसम रहने की उम्मीद है। हालांकि, मौसम की परिस्थितियों में बदलाव संभव है।
बर्फबारी और बारिश का असर तापमान पर भी दिखाई दिया। श्रीनगर में अधिकतम तापमान गिरकर 20 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि पहलगाम में यह 14.2 डिग्री और गुलमर्ग में 11.8 डिग्री सेल्सियस रहा। तापमान में गिरावट के साथ घाटी में ठंड बढ़ने लगी है और स्थानीय लोगों ने गर्म कपड़े पहनना शुरू कर दिया है। सर्दियों में कश्मीर का लोकप्रिय ऊनी परिधान ‘फिरन’ एक बार फिर लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बनने लगा है।
मौसम विभाग ने किसानों और सेब उत्पादकों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्हें कटी हुई फसल और तोड़े जा चुके सेब का सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित करने को कहा गया है, क्योंकि 15 अक्टूबर तक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तेज हवाओं, गरज-चमक, बारिश और बर्फबारी की आशंका जताई गई है। यात्रियों और पर्यटकों को मौसम की स्थिति देखकर यात्रा करने की सलाह दी गई है, जबकि पर्वतारोहियों से मौसम में सुधार होने तक पर्वतीय अभियानों से बचने को कहा गया है।
घाटी में कृषि कार्य भी अब अगले चरण में पहुंच रहा है। धान की फसल की कटाई पूरी हो चुकी है, जबकि सेब की लगभग 90 प्रतिशत फसल तोड़े जाने की जानकारी है। किसान अब रबी की फसलों, विशेषकर तिलहन की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। हाल में हुई बारिश से खेतों में नमी बढ़ने के कारण किसानों को आगामी बुवाई के लिए लाभ मिलने की उम्मीद है।
पहाड़ों पर हुई ताजा बर्फबारी से क्षेत्र के जलस्रोतों को भी लाभ मिलने की संभावना है। बर्फ पिघलने और बारिश के कारण झरनों, पहाड़ी धाराओं, झीलों तथा कुओं में जलस्तर बढ़ सकता है। इससे आगामी सर्दियों के महीनों में पानी की उपलब्धता बेहतर रहने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए फिलहाल मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करना और यात्रा के दौरान सतर्कता बरतना जरूरी है।

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