जापान के 10 साल के छात्र की अनोखी खोज: तितलियों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी यादों के स्थानांतरण के मिले संकेत
ज्यादातर जानवरों को ना सिर्फ अपने परिवार या इलाके के दूसरे जानवर बल्कि आसपास के इंसानों की भी पहचान होती है। क्या ऐसा ही तितलियों और दूसरे छोटे-छोटे कीड़ों के बारे में भी कहा जा सकता है।

टोक्यो/एजेंसी। जापान के कोबे शहर में रहने वाले 10 वर्षीय छात्र जो नगाई ने तितलियों पर किए गए अपने अनोखे प्रयोग से वैज्ञानिक समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है। अपनी जिज्ञासा और लगन के बल पर नगाई ने यह संकेत दिए हैं कि तितलियों में यादें न केवल कायापलट (मेटामॉर्फोसिस) के बाद भी बनी रह सकती हैं, बल्कि अगली पीढ़ियों तक भी स्थानांतरित हो सकती हैं।
जानकारी के अनुसार, जो नगाई एशियन स्वैलोटेल तितलियों का पालन-पोषण कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने देखा कि जब वे तितलियों को खुले में छोड़ते हैं, तो वे कुछ देर उड़ने के बाद उनके पास वापस लौट आती हैं। इस व्यवहार ने उनके मन में यह प्रश्न उत्पन्न किया कि क्या तितलियां अपने पालक को पहचान सकती हैं।
अपने सवाल का उत्तर खोजने के लिए नगाई ने वैज्ञानिक अध्ययन की ओर रुख किया और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी की कीट-वैज्ञानिक डॉ. मार्था वीस से संपर्क किया। वीस ने उनकी जिज्ञासा की सराहना करते हुए उन्हें मार्गदर्शन दिया, जिसके बाद दोनों के बीच एक अनोखी वैज्ञानिक मेंटरशिप शुरू हुई।
नगाई ने घर पर ही सरल संसाधनों का उपयोग करते हुए एक प्रयोग तैयार किया। उन्होंने कैटरपिलर (इल्ली) के एक समूह को लैवेंडर ऑयल की गंध के साथ हल्के कंपन (वाइब्रेशन) को जोड़कर प्रशिक्षित किया, जबकि दूसरे समूह को बिना किसी प्रशिक्षण के रखा गया। इसके बाद जब कैटरपिलर तितलियों में परिवर्तित हुए, तो उन्हें वाई-आकार की भूलभुलैया में परीक्षण के लिए रखा गया, जहां एक ओर लैवेंडर की गंध और दूसरी ओर बिना गंध का विकल्प था।
प्रयोग के परिणामों में पाया गया कि प्रशिक्षित समूह की तितलियां लैवेंडर की गंध से बचती रहीं, जबकि नियंत्रण समूह में ऐसा कोई स्पष्ट रुझान नहीं दिखा। इससे संकेत मिला कि कायापलट के दौरान शरीर और मस्तिष्क के पूर्ण पुनर्गठन के बावजूद कुछ यादें सुरक्षित रह सकती हैं।
नगाई ने अपने शोध को आगे बढ़ाते हुए तितलियों की अगली पीढ़ियों पर भी परीक्षण किया। आश्चर्यजनक रूप से बिना किसी प्रशिक्षण के अगली पीढ़ियों की तितलियों ने भी लैवेंडर की गंध से दूरी बनाए रखी। इससे यह संकेत मिला कि अनुभवजन्य यादें पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थानांतरित हो सकती हैं।
जो नगाई ने अपने निष्कर्षों को 33 पृष्ठों की शोध रिपोर्ट में संकलित किया, जिसने वैज्ञानिक समुदाय को चौंका दिया। उन्होंने वर्ष 2024 में कोबे, जापान में आयोजित इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ एंटोमोलॉजी में अपनी खोज प्रस्तुत की।
विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि तितलियां मनुष्यों की तरह अपने बच्चों को सिखाती नहीं हैं, फिर भी यह शोध इस संभावना की ओर इशारा करता है कि एक पीढ़ी के अनुभव अगली पीढ़ी के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।
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