जम्मू-कश्मीर के कठुआ में बिना शौचालय के बना दिए बंकर, लोग परेशान

हीरानगर सेक्टर के सीमावर्ती गांवों में व्यक्तिगत बंकरों के साथ शौचालय निर्माण की मांग जोर पकड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में महिलाओं और बच्चों को असुविधा होती है।

हीरानगर/कठुआ। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे हीरानगर सेक्टर के सीमावर्ती गांवों में लोगों की सुरक्षा के लिए बनाए गए व्यक्तिगत बंकरों के साथ शौचालय निर्माण की मांग फिर से जोर पकड़ने लगी है।
ग्रामीणों का कहना है कि सामुदायिक बंकरों में शौचालय और स्नानघर जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं, जबकि घरों में बनाए गए व्यक्तिगत बंकरों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। इससे आपात स्थिति में परिवारों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
क्षेत्र निवासी प्रदीप कुमार, पवन कुमार, कुलदीप कुमार, रमेश चंद्र और तरसेम लाल ने बताया कि हीरानगर सेक्टर के सीमावर्ती गांवों में लगभग 1150 शौचालयों के निर्माण का कार्य एक गैर सरकारी संस्था को सौंपा गया था, लेकिन संस्था ने काम अधूरा छोड़ दिया।
इसके कारण आज भी अनेक परिवारों के घरों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है। उनका कहना है कि जिन परिवारों के पास शौचालय नहीं हैं, उनके व्यक्तिगत बंकरों के साथ शौचालय का निर्माण कराया जाना चाहिए ताकि किसी भी आपात स्थिति या सीमा पर तनाव के दौरान लोगों को आवश्यक सुविधाएं मिल सकें।
ग्रामीणों ने बताया कि यह मांग वे पहले भी कई बार प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठा चुके हैं, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनका कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाना आवश्यक है।
इस संबंध में मढ़ीन के खंड विकास अधिकारी जावेद अहमद ने बताया कि हाल ही में वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने व्यक्तिगत बंकरों के साथ शौचालय निर्माण की मांग प्रमुखता से उठाई थी।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में गांवों का सर्वे कराया गया है और प्रस्ताव तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दिया जाएगा। प्रस्ताव पर स्वीकृति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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