‘गौमाता को कटने नहीं देंगे, हिंदुओं को बंटने नहीं देंगे’; बंगाल में योगी का नारा हिट, अखिलेश की बढ़ाएगी टेंशन

बंगाल चुनाव के मैदान में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का नारा खासा हिट रहा। गौमाता को कटने नहीं देंगे, हिंदुओं को बंटने नहीं देंगे के नारे की खूब चर्चा रही।
लखनऊ ब्यूरो। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी बड़ी जीत की तरफ बढ़ती दिख रही है। अब तक के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी 200 सीटों के आंकड़े को पार करती दिख रही है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों के आसपास सिमटती दिख रही है। भारतीय जनता पार्टी को मिले प्रचंड जनादेश के पीछे कई वजहों को माना जा रहा है। इसमें हिंदू वोट पोलराइजेशन को महत्वपूर्ण फैक्टर के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप लगे थे। टीएमसी सांसद सयानी घोष का ‘काबा और मदीना’ वाले गाने को भाजपा ने बड़ा मुद्दा बना दिया। भारतीय जनता पार्टी ने ‘जय श्री राम’ और ‘जय मां काली’ के नारों के साथ प्रदेश में एक अलग माहौल बना दिया। पार्टी को बड़ी जीत मिली है। इसके पीछे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘गोमाता को काटने नहीं देंगे, हिंदुओं को बंटने नहीं देंगे’ वाला नारा भी खास कारगर रहा। हिंदू वोट को एकजुट करने में इस नारे की बड़ी भूमिका रही है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर ताकत झोंकने की तैयारी में है। उत्तर प्रदेश में भाजपा का किला 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान डगमगाता दिखा। देश के सबसे बड़े राज्य में भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर अपनी ताकत को बढ़ाने की कोशिशें में जुट रही है। ऐसे में पश्चिम बंगाल के चुनावी मैदान में दिया गया नारा उत्तर प्रदेश में कारगर साबित हो सकता है। दरअसल, मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए पॉलिटिक्स की रणनीति साफ कर चुकी है। ऐसे जातीय आधार पर वोटों के बिखराव को रोकने के लिए भाजपा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर जोर देती दिख सकती है।
उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान में भारतीय जनता पार्टी ने मुस्लिम वोट बैंक के तुष्टीकरण के मुद्दे को छेड़ना शुरू कर दिया है। सीएम योगी ने साफ संदेश दिया है कि हमारे सरकार की नीति किसी एक वर्ग के लिए नहीं है। सभी के विकास की योजना पर हम काम करेंगे। वहीं, विपक्षी दलों में मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश भी खूब हो रही है। हालांकि, पिछले दिनों सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार मंदिरों का रुख करते दिखे हैं। हालांकि, इस पर सवाल भी उठ रहे हैं। वहीं, यूपी में एआईएमआईएम से लेकर बसपा और कांग्रेस तक मुस्लिम वोटरों को साधने की कोशिश में है। ऐसे में समाजवादी पार्टी अपने परंपरागत वोट बैंक को छोड़कर कितना आगे बढ़ती है, देखना होगा।
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान भी मुस्लिम वोट बैंक एकमुश्त समाजवादी पार्टी के पक्ष में जाता दिखा। वहीं, जातीय आधार पर हिंदू वोट बैंक में सेंधमारी में विपक्षी दल सफल दिखा है। हालांकि, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण होने की स्थिति में परेशानी विपक्षी दलों की बढ़नी तय है। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद 10 सीटों पर हुए विधानसभा उपचुनाव इसका उदाहरण हैं। सीएम योगी ने ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ का नारा देकर विपक्ष की राजनीति पर बड़ा हमला बोल दिया था।
सीएम योगी आदित्यनाथ का ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ वाला नारा महाराष्ट्र से लेकर राजस्थान और हरियाणा-दिल्ली तक के विधानसभा चुनावों में खूब गूंजा था। अब गोमाता न कटने देने और हिंदुओं को न बंटने देने जैसे नारों के साथ भारतीय जनता पार्टी यूपी के चुनावी मैदान में उतरती दिख सकती है। हिंदुत्व वाला नारा बंगाल चुनाव की बड़ी जीत के बाद खूब उठ रहा है। बंगाल के चुनावी मैदान में वोटरों का एक वर्ग चुनाव में ‘हिंदू-मुस्लिम की बात’ का समर्थन करता दिखा। वोटरों ने मीडिया इंटरव्यू में साफ तौर पर कहा था कि इस विषय पर बात होनी ही चाहिए। अगर नहीं होनी चाहिए थी तो देश का बंटवार धर्म के आधार पर होना भी गलत था। चुनावी परिणाम में वोटरों की इस सोच का असर साफ दिखता है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता विस्व शर्मा कई जनसभाओं में कहते दिखे कि हमें मुसलमानों का वोट नहीं चाहिए। पश्चिम बंगाल में भी भाजपा का चेहरा सुवेंदु अधिकारी चुनाव परिणाम को हिंदुओं की जीत बताते दिखे। ऐसे में यूपी चुनाव में हिंदू-मुस्लिम वाली राजनीति का बड़ा असर दिख सकता है।
अखिलेश यादव को पीडीए पॉलिटिक्स को बचाने और चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। अखिलेश लगातार पश्चिम बंगाल में भाजपा की रणनीति सफल न होने और ममता बनर्जी की जीत के दावे करते रहे। हालांकि, अब उनकी करारी हार के बाद उनके सामने अपनी रणनीति को जमीन पर उतारने की चुनौती होगी। भाजपा अब सपा अध्यक्ष के बयानों को लेकर जनता के बीच पहुंचना शुरू कर रही है। सोशल मीडिया पर माहौल तो गरमा ही रहा है।
सीएम योगी आदित्यनाथ कानून व्यवस्था और विकास के मुद्दे पर बढ़त बनाते दिख रहे हैं। बुलडोजर मॉडल से लेकर एनकाउंटर पॉलिसी तक को पसंद किया जा रहा है। पार्टी ने आपसी मतभेदों को दूर कर एकजुटता को दिखाना शुरू कर दिया है। इसका नजारा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रिजल्ट प्रशासन के साथ ही दिखा।
सीएम ने मनाया जीत का जश्न
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट सदस्यों के साथ पश्चिम बंगाल में चुनावी जीत का जश्न मनाया। इस दौरान सीएम से लेकर मंत्रिमंडल के अन्य सहयोगी एकजुट दिखे। पिछले दिनों अखिलेश यादव लगतार भाजपा के भीतर गुटबाजी का दावा करते दिखे थे। उनके निशाने पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक रहे। अब केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के खिलाफ हमलावर रुख अपना लिया है। भारतीय जनता पार्टी के एकजुट होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यूपी विधानसभा चुनाव में उतरने की घोषणा कर दी है। ऐसे में विपक्ष के सामने चुनौती कठिन होने वाली है।




