योगी सरकार ने श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में किया इजाफा, नई दरों का श्रम विभाग ने जारी किया नोटिफिकेशन

उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के विरोध के बाद न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि की है। 1 अप्रैल से लागू नई दरों के तहत राज्य को तीन श्रेणियों में बांटा गया है।

लखनऊ/एजेंसी। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में श्रमिकों के विरोध और मजदूरी बढ़ाने की मांग के बाद प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी बढ़ा दी है। एक अप्रैल से नई दरों को लागू करने संबंधी अधिसूचना शुक्रवार को जारी कर दी गई।
नई व्यवस्था के तहत प्रदेशभर को तीन श्रेणियों में बांटा गया है और हर श्रेणी के लिए अलग-अलग मजदूरी दरें तय की गई हैं। गौतमबुद्ध नगर (नोएडा-ग्रेटर नोएडा) और गाजियाबाद को श्रेणी-1 में रखा गया है। अन्य नगर निगम वाले जिले श्रेणी-2 में हैं, जबकि बाकी सभी जिले श्रेणी-3 में शामिल किए गए हैं।
ऐसे में अब गाजियाबाद व गौतमबुद्धनगर के कुशल श्रमिकों को मार्च की तुलना में 3288 रुपये प्रतिमाह ज्यादा मिला करेंगे। प्रदेश के अन्य नगर निगमों व जिलों में कार्यरत श्रमिकों की भी मजदूरी कम से कम 1335 रुपये बढ़ेगी।
दरअसल, गौतमबुद्ध नगर में श्रमिकों ने हरियाणा की तर्ज पर मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद सरकार ने 13 अप्रैल को अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई।
समिति में प्रमुख सचिव (श्रम) डा. एमकेएस सुंदरम, श्रमायुक्त मार्कंडेय शाही, पांच श्रमिक प्रतिनिधि और तीन नियोक्ता प्रतिनिधि शामिल थे। समिति ने उसी दिन गौतमबुद्ध नगर का दौरा कर श्रमिकों, उद्योग प्रतिनिधियों और ठेकेदारों से बातचीत की। श्रमिकों ने महंगाई, किराए में बढ़ोतरी और जीवन यापन की मुश्किलों को प्रमुख मुद्दा बताया।
वहीं नियोक्ताओं ने वैश्विक शुल्क दरों में बढ़ोतरी, पश्चिम एशिया के हालात और सप्लाई चेन में बाधा से कारोबार प्रभावित होने की बात रखी। समिति की रिपोर्ट में कहा गया कि न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के तहत मजदूरी दरें उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर तय होती हैं।
वर्ष 2017 और 2024 में संशोधन प्रस्तावित थे, लेकिन लागू नहीं हो सके थे। अब 2026 के लिए 425 सूचकांक के आधार पर नई दरें प्रस्तावित की गई हैं। सरकार ने इन नई मजदूरी दरों को अंतरिम राहत के रूप में लागू करने का फैसला किया है। इन्हें जल्द ही सरकारी गजट में प्रकाशित किया जाएगा। हालांकि, ईंट-भट्ठा उद्योग को इस आदेश से बाहर रखा गया है, क्योंकि वहां मजदूरी पीस रेट (उत्पादन के आधार) पर तय होती है।
मार्च तक प्रदेशभर में एक समान मजदूरी तय थी। इसमें अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम 11,021 रुपये, अर्द्धकुशल श्रमिकों की 12,123 रुपये और कुशल श्रमिकों की 13,580 रुपये मासिक मजदूरी थी।अब गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर जिले की फैक्ट्री में कार्यरत श्रमिकों की अब जहां सबसे अधिक मजदूरी मिलेगी। वहीं लखनऊ सहित अन्य 16 नगर निगमों वाले जिलों में उससे लगभग पांच प्रतिशत कम जबकि शेष 57 जिलों में और पांच प्रतिशत कम रखते हुए मजदूरी तय हुई है।

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