राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र विशेष बैगा जनजाति की बेटी न्याय को तरसी! आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती में नियमों की अनदेखी का आरोप

मनेंद्रगढ़ आंगनबाड़ी केंद्र चेरवापारा, शंकरगढ़ में सहायिका भर्ती को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति की युवती संजू बाई ने दावा किया है कि पात्रता और दस्तावेज पूरे होने के बावजूद उसे सूची से बाहर कर दिया गया, जबकि चयनित महिला निवास पात्रता में अपात्र पाई गई। 13 जनवरी 2026 को कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज होने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच कर नियुक्ति निरस्त करने और पात्र बैगा जनजाति की बेटी को न्याय दिलाने की मांग की है।
शोभित शर्मा,एमसीबी/छत्तीसगढ़। जिले के महिला एवं बाल विकास परियोजना मनेंद्रगढ़ अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्र चेरवापारा, शंकरगढ़ में सहायिका पद पर हुई नियुक्ति अब गंभीर सवालों के घेरे में है। विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति की युवती संजू बाई ने आरोप लगाया है कि उसने सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ नियमानुसार आवेदन किया था। चेरवापारा केंद्र की मूल निवासी होने के कारण उसे प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी, लेकिन पात्रता सूची से बाहर कर दिया गया।
संजू बाई ने 13 जनवरी 2026 को कलेक्टर जनदर्शन में लिखित शिकायत दर्ज कर दावा-आपत्ति की पुनः जांच की मांग की थी। उसने अपने आवेदन में उल्लेख किया कि उसे कक्षा 8वीं में 66.9 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए हैं और वह विशेष बैगा जनजाति की महिला अभ्यर्थी है। इसके बावजूद अब तक शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे वह न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि चयनित महिला सोनी पति स्व. सुनील विवाह के बाद अपने ससुराल में निवास कर रही है और संबंधित ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में उसका नाम दर्ज नहीं है। ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव द्वारा प्रमाणित दस्तावेजों के अनुसार वह चेरवापारा की निवासी नहीं है। इसके बावजूद नियुक्ति आदेश जारी कर दिया गया, जिससे ग्रामीणों और अन्य आवेदकों में नाराजगी है।
परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास मनेंद्रगढ़ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि दस्तावेजों में कमियां होने के बावजूद आर्थिक लाभ लेकर चयनित अभ्यर्थी की नियुक्ति की गई, जबकि पात्र विशेष जनजाति की युवती को सूची से बाहर कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि मनेंद्रगढ़ परियोजना में सहायिका नियुक्ति में पैसों के लेन-देन का खेल चल रहा है।
पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे भर्ती प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दस्तावेजों की दोबारा समीक्षा हो और जांच के बाद नियुक्ति निरस्त कर पात्र विशेष बैगा जनजाति की बेटी को न्याय दिलाया जाए। अब सवाल यह है कि क्या विशेष जनजाति की महिला को उसका हक मिलेगा या शिकायत फाइलों में दबकर रह जाएगी।




