बीएचयू में डॉक्टरों ने रीढ़ की हड्डी की जगह कूल्हे का कर दिया ऑपरेशन! बुजुर्ग महिला की मौत के बाद खुली पोल

राधिका सिंह और राधिका देवी नामक दो महिला मरीजों का ऑपरेशन होना था। राधिका सिंह की हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी होनी थी जबकि राधिका देवी की रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर का ऑपरेशन होना था।
वाराणसी/उत्तर प्रदेश। वाराणसी में डॉक्टरों की लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू ) के ट्रॉमा सेंटर में राधिका नाम दो महिला मरीजों की अदला-बदली में 71 साल की महिला का गलत ऑपरेशन हो गया। मार्च में न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती महिला की रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर का ऑपरेशन होना था। उनको गलती से ऑर्थो के ऑपरेशन थिएटर में पहुंचा दिया गया। बिना जांच पड़ताल किए डॉक्टरों की टीम ने महिला के कूल्हे का ऑपरेशन शुरू कर दिया। इस दौरान डॉक्टरों को जब कोई समस्या नहीं नजर आई तो उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। महिला को तत्काल न्यूरोसजरी वार्ड में भेजा गया।
28 मार्च को राधिका देवी की हो गई मौत
राधिका देवी को ऑपरेशन थिएटर में 82 साल की राधिका सिंह की जगह ले जाया गया था, जिन्हें हिप रिप्लेसमेंट के लिए भर्ती किया गया था। अपनी गलती का एहसास होने पर डॉक्टरों ने राधिका देवी के घावों पर पट्टी बांधी और उनके परिवार को बिना बताए उन्हें वापस वार्ड में भेज दिया। यह घटना 7 मार्च को हुई थी। बाद में, 18 मार्च को देवी की रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर की सर्जरी हुई, जिसके बाद उन्हें कुछ दिक्कतें होने लगीं और 28 मार्च को उनकी मौत हो गई।
यह लापरवाही तब सामने आई जब राधिका देवी के पोते मृत्युंजय पाल ने बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डायरेक्टर प्रोफेसर एसएन संखवार से शिकायत की। ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख प्रोफेसर सौरभ सिंह से एक रिपोर्ट मांगी गई, और चार सदस्यों वाली एक कमेटी बनाई गई। इस कमेटी का अध्यक्ष उसी हड्डी रोग विभाग के डॉक्टर को बनाया गया, जिसकी टीम ने 7 मार्च को ऑपरेशन किया था। जब पाल ने इस पर आपत्ति जताई, तो कमेटी के अध्यक्ष को बदल दिया गया।
प्रोफेसर संखवार ने बताया कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए अध्यक्ष को बदला गया है। ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख ने कहा कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट जमा कर दी है, लेकिन उन्होंने चल रही जांच का हवाला देते हुए रिपोर्ट की विस्तृत जानकारी देने से मना कर दिया।
रिकॉर्ड से पता चलता है कि 82 साल की राधिका सिंह हड्डी रोग विभाग के बेड नंबर 17 पर थीं, जबकि बलिया की रहने वाली 71 साल की राधिका देवी न्यूरो विभाग के बेड नंबर 29 पर थीं। एनेस्थीसिया देने के बाद सर्जिकल टीम ने देवी का ऑपरेशन करना शुरू कर दिया। जब सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर को ऑपरेशन वाली जगह पर वैसी स्थिति नहीं दिखी, जैसी उन्हें उम्मीद थी, तो टीम ने सीनियर डॉक्टर को इसकी जानकारी दी। इसी बीच, नर्सिंग स्टाफ ने उन्हें बताया कि ऑपरेशन थिएटर में गलत मरीज को ले आया गया है। इसके बाद ऑपरेशन रोक दिया गया और देवी को वापस भेज दिया गया।




