कोटद्वार के जिम में 150 से घटकर हो गए 15 सदस्य, मुस्लिम दुकानदार का साथ देना ‘मोहम्मद’ दीपक को पड़ा भारी

कोटद्वार/उत्तराखंड। कोटद्वार में कपड़ों की दुकान ‘बाबा’ रखे जाने को लेकर बढ़े विवाद के बीच दीपक के आगे आने का मामला राष्ट्रीय स्तर पर खूब चर्चा में रहा। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी दीपक की तारीफ करते दिखे। राहुल गांधी ने दीपक को देश का हीरो करार दिया। हालांकि, मुस्लिम दुकानदार के पक्ष में खड़ा होना और खुद को मोहम्मद दीपक कहना पड़ा इस जिम ट्रेनर को भारी पड़ गया। उसकी जिम में लगातार आने वाले सदस्यों की संख्या कम होती गई। विवाद से पहले दीपक की जिम में 150 सदस्य आते थे। विवाद गहराने के बाद जिम में आने वाले सदस्यों की संख्या घटकर 15 रह गई है।
दरअसल, 26 जनवरी को कोटद्वार में बाबा नाम के कपड़े की दुकान पर बजरंग दल के सदस्य पहुंचकर हंगामा करने लगे थे। वे मुस्लिम दुकानदार के दुकान का नाम बाबा रखे जाने का विरोध कर रहे थे। वे नाम बदलने की मांग कर रहे थे। 70 वर्षीय मुस्लिम दुकानदार को परेशान देखकर वहां दीपक कुमार पहुंचे। उन्होंने बजरंग दल के सदस्यों को वहां से पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। बजरंग दल के सदस्यों के विरोध में खड़े हुए दीपक सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद चर्चा में आ गए। इसमें वे मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में खड़े होकर खुद का नाम मोहम्मद दीपक बताया था।
दीपक को इस घटना की कीमत अब चुकानी पड़ी है। उसके जिम के अधिकतर सदस्य चले गए हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दीपक की जिम द हल्क के करीब 90 फीसदी सदस्यों ने यहां आना बंद कर दिया है। बजरंग दल के सदस्यों से दीपक की भिड़ंत के बाद यह स्थिति सामने आई है। दीपक का कहना है कि उनका जिम एक किराए के मकान में चलता है। यहां पर 150 सदस्य आते थे। अब रोज 15 सदस्य ही आ रहे हैं।
दीपक (38) ने 26 जनवरी को कुछ लोगों के एक ग्रुप का विरोध किया, जो 70 साल के एक मुस्लिम दुकानदार को परेशान कर रहे थे। बुजुर्ग दुकानदार को पार्किंसन की बीमारी है। बजरंग दल के सदस्य अपनी दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटाने की मांग कर रहे थे। बहस के दौरान, जब दीपक से उनका नाम पूछा गया, तो उन्होंने भीड़ से कहा कि उनका नाम मोहम्मद दीपक है। इस बहस का वीडियो वायरल हो गया। इससे दीपक सुर्खियों में आ गए। इसके साथ ही उन्हें अनचाही अटेंशन भी मिली। 31 जनवरी को कोटद्वार में एक बार फिर बवाल खड़ा हो गया। बजरंग दल के कई सदस्य दीपक के विरोध में एकजुट हो गए। इस दौरान उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की गई। हालांकि, पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस घटना के बाद से ही कोटद्वार में माहौल गरमाया हुआ है।
कोटद्वार में 26 और 31 जनवरी की घटना के बाद से लोग दो भाग में बंट गए हैं। एक वर्ग दीपक के साथ हैं तो दूसरा वर्ग उनके काम से नाराज है। दीपक का कहना है कि आधे शहर के लोग मेरा साथ देते हैं, लेकिन जब आप अच्छे काम करते हैं तो लोग तारीफ नहीं करते। ईमानदारी की कीमत चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि हमारे जिम को इसका नुकसान हुआ है। लोग डरे हुए हैं और मैं यह समझता हूं।
दीपक कुमार ने कहा कि हमारा जिम एक पूरे फ्लोर पर चलता है, जिसका किराया 40,000 रुपये महीना है। हमारे परिवार की सिर्फ एक ही इनकम है। मैंने हाल ही में घर बनवाया है। अभी भी 16,000 रुपये महीने की लोन की किस्त चुका रहा हूं। उन्होंने कहा कि बचे हुए सदस्यों ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वे साथ रहेंगे। उन्होंने कहा कि सदस्य कम होने की दर बहुत ज्यादा है। अगर आप एक मेंबर खो देते हैं, तो उन्हें वापस लाना मुश्किल होता है।
रविवार को राज्यसभा में माकपा की पार्लियामेंट्री पार्टी के नेता सांसद जॉन ब्रिटास ने बाबा ड्रेस के मालिक वकील अहमद और दीपक कुमार से मुलाकात की। एक ट्वीट में माकपा सांसद ने कहा कि उन्होंने जिम का दौरा किया और मेंबरशिप ली, क्योंकि अब वह ‘सांप्रदायिक तत्वों से मिल रही धमकियों के कारण’ खाली हो गया है। सांसद ब्रिट्टास ने कोटद्वार पुलिस स्टेशन में भी अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
सांसद ने आरोप लगाया कि कोटद्वार पुलिस ने दंगाइयों को बचाने के साथ-साथ दीपक के खिलाफ केस दर्ज किया है। उन्होंने फासीवादी गुंडों के खिलाफ निडर होकर स्टैंड लेने के लिए ‘मोहम्मद’ दीपक को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इन जैसे लोग देश की सच्ची उम्मीद और ताकत हैं।
दीपक कुमार अब तक शहर के लोगों के साथ नहीं देने से निराश हैं। उनका कहना है कि मुझे अब भी नहीं लगता कि मैंने कुछ गलत किया है। बाहर के लोग मेरा साथ दे रहे हैं, लेकिन शहर के लोग अभी तक साथ नहीं आए हैं। चीजें धीरे-धीरे आगे बढ़ रही हैं, लेकिन सब ठीक हो जाएगा। इस बीच, पुलिस ने दीपक कुमार को सुरक्षा दी है। साथ ही, कोटद्वार शहर में अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई है।

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