मथुरा में ध्वस्तीकरण के लिए 800 से ज्यादा मकान चिह्नित

जद में पीएम आवास योजना के भवन भी शामिल

मथुरा/उत्तर प्रदेश। मथुरा एस्केप नहर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अब केवल अतिक्रमण हटाने का मामला नहीं रह गया है। यहां जिन मकानों पर प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का सरकारी पत्थर लगा है, उन पर भी लाल निशान लगा दिया गया है। सवाल है कि सरकार ने जांच-पड़ताल के बाद जिन घरों को बनाने के लिए ढाई-ढाई लाख रुपये अनुदान राशि दी, वही आज उजाड़े जाने के दायरे में आ गए हैं। सिंचाई विभाग ने एक सप्ताह पूर्व मथुरा एस्केप की भूमि पर बने करीब 800 मकान, दुकान व प्रतिष्ठानों को अतिक्रमण मानते हुए लाल निशान लगाए हैं। अतिक्रमण की जद में आए इन मकानों में से दो दर्जन से अधिक ऐसे मकान हैं, जिनका निर्माण प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत मिले अनुदान से हुआ है।
इस योजना में लाभ देने से पहले आवास सर्वे, दस्तावेज सत्यापन, फोटो अपलोड, बैंक खाते में किस्त और लखनऊ स्तर तक कई बार सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होती है। जांच में भूस्वामित्व भी देखा जाता है। सवाल उठता है कि लाभार्थी अगर अतिक्रमणकारी हैं तो सरकारी योजना ने उन्हें आवास के लिए दो लाख रुपये का अनुदान क्यों और कैसे मिला। लाभार्थी यशोदा ने बताया कि उनका आठ लोगों का परिवार है। मकान टूटने पर सड़क पर आ जाएंगे। लाभार्थी प्रगति चौहान ने बताया कि भाई की मृत्यु के बाद परिवार मुफलिसी में है। प्रधानमंत्री आवास योजना से छत मिली है। यही घर टूट गया तो हमारे पास कुछ नहीं बचेगा। डिप्टी कलक्टर व पीओ डूडा राजकुमार चौधरी ने बताया कि पीएम आवास लाभार्थियों से जुड़े मकानों का सर्वे कराया जाएगा। डीएम से वार्ता कर पुनर्वास और आगे की रणनीति तैयार कराएंगे। सिंचाई विभाग के एक्सईएन नवीन कुमार का कहना है कि हाई कोर्ट के आदेश के तहत अतिक्रमण चिह्नित किया गया है। 20 फरवरी को सुनवाई है। नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुनर्वास आदि को लेकर विचार विमर्श करेंगे। उसके बाद जो निर्णय होगा, तभी कुछ कहा जा सकेगा।
अतिरिक्त पानी को यमुना तक पहुंचाने के लिए मथुरा एक्सेप (नहर) का निर्माण किया गया था। 15 किमी लंबी इस नहर के साढ़े तीन किमी हिस्से में अतिक्रमण के बाद आबादी बस गई। 35 फीट चौड़ी नहर थी जो अब आठ फीट रह गई है। इसकी भूमि पर करीब 800 मकान-दुकान हैं। 18 दिसंबर 2013 को हाई कोर्ट ने जनहित याचिका पर नहर की मूल चौड़ाई बहाल करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मामला चलता रहा। 22 फरवरी 2023 को हाई कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में दखल से इन्कार करते हुए सरकार से पुनर्वास की व्यवस्था के निर्देश दिए। अतिक्रमण हटाने में देरी पर 2025 में अवमानना याचिका दाखिल हुई। इसके बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। आनन-फानन में अतिक्रमण पर निशान लगाने की कार्रवाई पूरी की गई। पिछले शनिवार को अतिक्रमण हटाने जाने की तैयारी थी, लेकिन मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर मामला रुक गया।

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