अंधा सिस्‍टम… बेरहम भगवान! गोरखपुर की जेल में बंद थे मां-बाप, मिलने की तड़प में 3 साल के मासूम ने तोड़ा दम

गोरखपुर/उत्तर प्रदेश। गोरखपुर में एक बेहद हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां जेल में बंद दंपति को एक ऐसा दर्दनाक मंजर देखना पड़ा, जिसे जान और सुनकर सभी की आंखें नम हो गई। 3 वर्षीय मासूम बेटे की मौत के बाद दंपति को उसके अंतिम दर्शन भी नहीं हो पाए। वीडियो कॉल पर जब बेटे को मां ने मृत अवस्था में देखा तो बेहोश हो गई। वही पिता की भी रो-रो कर हालत खराब है। यह दृश्य देख जेल में उपस्थित कैदियों और पुलिसकर्मियों के लिए आंखें नम हो गई।
मिली जानकारी के मुताबिक पीपीगंज थाना क्षेत्र के पचगांवा निवासी 35 वर्षीय राहुल पटेल और 32 वर्षीय पत्नी वंदना पटेल का पिछले कुछ माह पहले अपने पट्टीदारों से जमीन को लेकर विवाद हो गया था। मारपीट के दौरान राहुल और वंदना पर पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दोनों को जेल भेज दिया था। तभी से दंपति जिला जेल में बंद थे। इस दौरान उनके दो बच्चे 5 वर्षीय बिटिया शैलजा और 3 वर्षीय सूरज की परवरिश गुलरिया थाना के डुमरी नंबर दो निवासी बच्चों के नाना गिरधारी पटेल कर रहे थे।
गिरधारी मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनका कहना था कि कुछ दिनों पहले सूरज और शैलजा को उनके मम्मी-पापा से मिलाने जेल ले गए थे। तब से सूरज लगातार रो रहा था और जिद कर रहा था कि वह अपनी मम्मी के पास जाएगा। इसी बीच सोमवार को अचानक से उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे जिला अस्पताल लेकर गए। लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस असहनीय दर्द के साथ परिजन, माता-पिता को मासूम बेटे के अंतिम दर्शन कराने हेतु जेल लेकर पहुंचे, लेकिन जेल प्रबंधन ने इसकी अनुमति नहीं दी। अंत में पुलिस की मौजूदगी के दौरान दाह संस्कार के समय शमशान घाट से वीडियो कॉल कर मासूम सूरज के मम्मी-पापा को उसके अंतिम दर्शन कराए गए, जैसे ही मां ने अपने बेटे की लाश देखी वह दहाड़े मारकर बेहोश हो गई। वहीं पिता भी दहाड़े मार कर रोने लगा। यह दृश्य देख जेल में उपस्थित कैदियों और पुलिसकर्मियों की भी आंखें नम हो गई।
जेल स्टाफ ने बड़ी मशक्कत से दोनों को ढांढस और चुप होने को कहा, लेकिन दोनों के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। जिसने भी इसके बारे में सुना सभी हतप्रभ रह गए। लोग कह रहे हैं कि नियति और सिस्टम का यह क्रूर मजाक उस मासूम पर भारी पड़ गया जिसने अभी अपने जीवन की ठीक से शुरुआत भी नहीं की थी।
इस बारे में जेल प्रबंधन का कहना है कि जेल मैनुअल के कुछ नियम और कोड कंडक्ट है। जिसकी वजह से जेल में बंद कैदियों को जेल के अंदर रहते हुए किसी मृतक परिजन की बॉडी नहीं दिखाई जा सकती। रही बात मासूम बच्चों की तो 6 साल की उम्र तक के बच्चे अपने मां-बाप के साथ रह सकते हैं, इसके लिए भी नियम कानून फॉलो करने पड़ेंगे जेल में बंद दंपति राहुल और वंदना की एक पांच साल की बेटी है, जेल नियमों के आधार पर उसे अपने माता-पिता के पास रहने की अनुमति मिल सकती है, यह उस स्थिति में संभव है जब बच्चे का कोई अभिभावक उन्हें अपने पास रखने को तैयार न हो।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button