गुजरात दौरे में राष्ट्रपति को आदिवासी समुदाय की महिला ने बताई आपबीती

मैडम... दो किलो अनाज मिलता है, हमारी आवाज दबा दी जाती है

अहमदाबाद/एजेंसी। गुजरात में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे में एक ऐसी घटना सामने आई है। जिसने कई सवाल खड़े कर दिया है। द्रौपदी मुर्मू ने 10 अक्तूबर को जूनागढ़ में आदिवासी समाज की महिलाओं से संवाद किया था। राष्ट्रपति के इस कार्यक्रम में तमाम अधिकारियों के साथ राज्य के पर्यटन मंत्री मुलु बेरा भी मौजूद थे। राष्ट्रपति के कार्यक्रम के दौरान एक महिला ने कहा कि मैडम, हमें दो किलो अनाज मिलता है, हमारे पास नौकरी तक नहीं है, हमारी आवाज दबा दी जाती है। सिदी समुदाय की महिला की तकलीफ सुनने क लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंच से नीचे उतरकर गईं। महिला ने जैसे ही कहा कि मैडम तो द्रौपद मुर्मू का संवेदनशील रवैया सामने आया, लेकिन इस घटनाक्रम से वहां मौजूद अफसरों को होश उड़ गए।
जूनागढ़ की घटना के बाद सवाल खड़ा हो रहा रहा है कि राष्ट्रपति के वीवीआईपी कार्यक्रम में ऐसी ऐसा सामान्य बात नहीं है। इस मतलब है कि नीचे के स्तर पर स्थिति गंभीर है। महिला ने राष्ट्रपति को अपनी बात कही तो वहीं अफसर चुप्पी साधे रहे। वे सन्न रह गए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तीन दिवसीय गुजरात दौरे पर थीं। इस बीच शुक्रवार को अपने दौरे के दूसरे दिन उन्होंने जूनागढ़ के पास सासन स्थित सिंह सदन में आदिवासी समूहों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। यह घटना तब हुई जब कार्यक्रम संपन्न घोषित कर दिया गया। राष्ट्रपति जाने वाली थीं, अचानक एक महिला ने उन्हें रोका और गुजरात मॉडल की वास्तविकता के बारे में अनौपचारिक चर्चा की।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की इस अनौपचारिक बातचीत का एक वीडियाे भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। इसमें महिला साफतौर पर कह रही है कि केवल दो किलो अनाज मिलता है। लोगों के पास नौकरी नहीं है। जब हम यह मुद्दा उठाते हैं, तो सत्ता में बैठे लोग हमारी आवाज़ दबा देते हैं। इस पूरी घटना पर जूनागढ़ जिला प्रशासन और राज्य सरकार ने कोई प्रतिक्रिय नहीं दी है लेकिन सवाल खड़ा हो रहा है कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम अगर किसी महिला ऐसी बात रखी तो क्या जमीनी हकीकत से सरकार वाकिक नहीं है।

महिला ने राष्ट्रपति मुर्मू से क्या कहा?
महिला: महोदया, दो मिनट
राष्ट्रपति: क्या?
महिला: सुविधाएं तो हैं, लेकिन अच्छी नहीं।
राष्ट्रपति: अच्छी सुविधाएं तो क्या?
महिला: महोदया, इसका मतलब है कि आप सुविधाएं देती हैं, हमें ठीक से नहीं मिलतीं। हमें राशन
मिलता है। वह भी कम मिलता है।
राष्ट्रपति: कितना कम?
महिला: सिर्फ दो किलो राशन मिलता है।
राष्ट्रपति: सभी लोगों को सिर्फ दो किलो मिलता है? (मौजूद सभी लोग) हां, महोदया, सभी लोगों को इतना ही मिलता है
महिला: हमारे लोगों के पास तो नौकरी भी नहीं है। सिर्फ दो-तीन लोगों के पास नौकरी है, बाकी बेरोजगार हैं। हम गरीबी में जी रहे हैं। हमें आगे बढ़ने का मौका भी नहीं दिया जाता। जब हम आवाज़ उठाने की कोशिश करते हैं, तो हमें दबा दिया जाता है। दिया जाता है
राष्ट्रपति: क्या यह सच है? (सभी) हां मैडम, यह सच है
महिला: हमारी आवाज उठान का भी मौका नहीं दिया।

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