सर्द भरी रातों में होस्टल गर्ल्स का 4 दिन से राजस्थान विश्वविद्यालय में धरना
Hostel girls have been protesting in Rajasthan University for 4 days in the cold nights

- राजस्थान विश्वविद्यालय कैंपस में हॉस्टल गर्ल्स पिछले चार दिन से धरने पर बैठी हैं
- छात्राओं की मांग है कि हॉस्टल वार्डन ज्योति मीणा को जल्द से जल्द हटाया जाए
- छात्राओं का आरोप है कि वार्डन को उनकी शिकायतों के बाद हटाया गया था
- धरने के चौथे दिन एक छात्रा पूजा बैरवा की तबीयत बिगड़ गई
जयपुर/एजेंसी। जयपुर शहर स्थित राजस्थान विश्वविद्यालय कैंपस में हॉस्टल गर्ल्स पिछले चार दिन से धरने पर बैठी हैं। दिन के समय वे धरना स्थल पर विरोध प्रदर्शन करती हैं और रात्रि के समय भी धरना स्थल पर ही डटी रहती हैं। रात्रि के समय कड़ाके की ठंड होने के बावजूद भी ये गर्ल्स धरने से हटने को तैयार नहीं है। करीब एक दर्जन से ज्यादा छात्राएं राजस्थान विश्वविद्यालय में कुलपति सचिवालय के सामने धरना दे रही हैं। इन गर्ल्स का कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन अपनी जिद पर अड़ा रहा और उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। अगर ऐसा ही व्यवहार रहा तो आगामी दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा। छात्राओं ने राजस्थान विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर धरना देने की चेतावनी दी है।
दरअसल, माही हॉस्टल में रहने वाली ये छात्राएं हॉस्टल वार्डन को हटाने की मांग कर रही है। उनका कहना है कि छात्राओं की शिकायत पर ही कुछ समय पहले वार्डन ज्योति मीणा को हटाया गया था। पिछले दिनों वार्डन को बहाल करते हुए फिर से माही छात्रावास का वार्डन बना दिया। छात्राओं का कहना है कि जिस वार्डन को छात्राओं की शिकायत पर हटाया, उन्हें वापस क्यों लगाया गया। अगर ऐसा ही करना था तो पहले हटाया ही क्यों गया।
कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन एनएसयूआई ने छात्राओं की मांग को जायज बताते हुए उनका समर्थन किया। एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष विनोद जाखड़ दो दिन पहले छात्राओं से मिलने गए। जाखड़ ने कहा कि विश्वविद्यालय में महिला कुलपति होने के बावजूद छात्राओं की सुनवाई नहीं हो रही है। इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है। जाखड़ ने कहा कि छात्राएं ठिठुरती सर्दी में धरने पर बैठी है। इन छात्राओं की सुरक्षा के लिए न तो कोई महिला सुरक्षा गार्ड उपलब्ध है और ना ही अन्य आवश्यक इंतजाम। विश्वविद्यालय प्रशासन का कोई प्रतिनिधि इन बहनों से मिलने नहीं तक पहुंचा है।
धरने के चौथे दिन शनिवार रात को एक छात्रा पूजा बैरवा की तबीयत खराब हो गई। अन्य कई छात्राएं भी तबीयत खराब होने की शिकायत कर रही है। छात्राओं का कहना है कि जब तक वार्डन को हटाया नहीं जाएगा तब तक वे धरना स्थल से नहीं हटेंगी। एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की हठधर्मिता और तानाशाही रवैया बिल्कुल जायज नहीं है। अगर इन बहनों की मांगें नहीं मानी गई तो एनएसयूआई भी सड़कों पर उतरेगी।




