मिर्जापुर में लाइसेंसधारकों का भौकाल! एक-दो नहीं 3-3 असलहे रखने के शौकीन लोग

मिर्जापुर/उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में हथियार के बिना भौकाल नहीं बनाया जा सकता है। दबदबा तभी बनेगा, जब असलहा साथ दिखेगा। यूपी का जिला मिर्जापुर जिला भौकाल के लिए ही मशहूर है। जिले में पूर्व विधायक से लेकर पूर्व एसपी तक तीन-तीन लाइसेंसी असलहा लेकर माहौल बनाए हुए हैं। 2019 में लाइसेंस के नियम बदल गए, लेकिन यहां के लोगों का शौक नहीं बदला। पांच वर्षों में पुलिस भी नियमों का पालन नहीं करा सकी। चुनाव से पहले जब सत्यापन शुरू हुआ तो पता चला कि अभी भी 14 लाइसेंसधारकों ने तीन-तीन असलहा लिए हुए हैं। अब जिला प्रशासन नोटिस जारी करके असलहा जमा कराने की बात कह रही है।
मिर्जापुर जिले में कुल 23 लाइसेंसधारकों ऐसे के तीन-तीन हथियार थे। नए नियम आने के बाद नौ लाइसेंसधारकों ने एक-एक असलहा सरेंडर कर दिया, लेकिन अभी भी 14 लाइसेंसधारकों ने अपने असलहे सरेंडर नहीं किए। जिला प्रशासन ने नए नियम आने के बाद सभी को एक असलहा सरेंडर करने के लिए कहा था। पांच साल बीत जाने के बाद भी 14 लोगों ने एक असलहा नहीं जमा किए। हथियार जमा नहीं करने वालों में पूर्व विधायक भाईलाल कोल, पूर्व एसपी श्रीराम त्रिपाठी, अनुज कुमार बरनवाल, बच्चालाल पाठक, भरतलाल, विश्वनाथ सिंह, दीनानाथ सिंह, राजेंद्र प्रसाद सिंह, शिवशंकर सिंह यादव, श्रीराम भारती, सूर्यभान, विद्युत कुमार सिंह, विजय शंकर सिंह, शिवशंकर चौबे है। प्रशासन भी इनके ऊपर मेहरबान रही, जहां इनके हथियारों को जमा नहीं कराया।
पुराने नियमों के तहत एक व्यक्ति आत्मसुरक्षा के लिए तीन लाइसेंसी हथियार रख सकते थे। 2019 में नियमों में संशोधन किया गया। नए नियमों के तहत एक व्यक्ति दो ही असलहा रख सक है। एसपी नक्सल ओपी सिंह ने बताया कि नए नियमों को तहत तीन असलहा रखना गैरकानूनी है। एक व्यक्ति सिर्फ दो असलहा रख सकता है। 14 लोग ऐसे है, जिनके पास तीन असलहा है। अगर जल्द ही उन्होंने अपना लाइसेंसी असलहा जमा नहीं करते है। उन्हें नोटिस जारी करके विधिक कार्रवाई की जाएगी।




