श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्षकार को पाकिस्तान से मिली बम से उड़ाने की धमकी

मथुरा/उत्तर प्रदेश। श्रीकृष्ण जन्मभूमि के एक पक्षकार को मंगलवार देर रात पाकिस्तान से एक धमकी भरा फोन कॉल आया। पक्षकार का कहना है कि वह श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मामले में हाईकोर्ट में बुधवार को होने वाली सुनवाई में शामिल होने के लिए मंगलवार रात को प्रयागराज जाने के लिए निकले थे तभी रास्ते में उन्हें धमकी भरा फोन कॉल आया। इससे पहले भी उन्हें इस तरह की धमकी मिल चुकी हैं। दरअसल श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मामले में सुनवाई चल रही है। बुधवार को होने वाली सुनवाई में पक्षकार श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष और शाकुंभरी पीठ के महंत आशुतोष पांडे मंगलवार रात मथुरा से प्रयागराज जाने के लिए निकले।
पक्षकार आशुतोष पांडेय के मोबाइल पर +923029854231 नंबर से कॉल आई। आशुतोष पांडेय ने जैसे ही कॉल रिसीव की, कॉलर ने गाली देनी शुरू कर दी। उसने कहा, ‘जन्मभूमि में घुस कर तो देख, तुझे बम से उड़ा देंगे।’ इतना ही नहीं, फोन करने वाले ने देवी देवताओं को लेकर भी गलत शब्दों का प्रयोग किया। इससे पहले भी आशुतोष को दो बार धमकियां मिल चुकी हैं, जिसके बारे में उन्होंने पुलिस से शिकायत की और अभी तक जांच चल रही है वहीं मंगलवार रात को आए धमकी भरे फोन कॉल में फोन करने वाले ने कहा कि चाहे 50 एजेंसी जांच कर लें, उसका कोई कुछ नहीं कर सकता।
6 जनवरी 2024 को आशुतोष को पहली धमकी मिली। कॉलर ने अपने को पाकिस्तान मुस्लिम संगठन का चीफ बताते हुए धमकी दी कि कोर्ट और यात्रा में गए तो सिर कलम कर देंगे। इसके साथ ही फेसबुक आईडी हैक करने की धमकी दी। इसके बाद फेसबुक आईडी हैक कर ली गई। पाकिस्तान के आतंकी संगठन ने श्री मठ माहेश्वरी धाम में धमाका कराने की धमकी दी। इसका संज्ञान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया। प्रमुख सचिव की ओर से 17 जनवरी 2024 को मुकदमा दर्ज करने का आदेश मथुरा पुलिस को दिया गया। फिर मुकदमा दर्ज हुआ।
इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट से वापस मथुरा आते समय 22 फरवरी 2024 को धमकी दी गई। आशुतोष पांडेय फतेहपुर पहुंचे थे, तभी कॉल आई। जिसमें पाकिस्तान मुस्लिम संगठन ने फिर बम से उड़ाने की धमकी दी। इसका मुकदमा फतेहपुर कोतवाली में दर्ज है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान-शाही ईदगाह मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल अर्जियों पर सुनवाई चल रही है। अदालत अभी इस पर सुनवाई कर रही है कि मामला सुनने लायक है या नहीं।

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